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Jodhpur News: एम्स जोधपुर में विधि-चिकित्सा संगम, मेडिकल रेगुलेशन और पेटेंट पर मंथन

AIIMS Jodhpur: एम्स जोधपुर और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के संयुक्त आयोजन में चिकित्सा और विधि के समन्वय पर मंथन हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अनुसंधान, पेटेंट और इच्छामृत्यु जैसे अहम विषयों पर गहन चर्चा की।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए। फोटो- पत्रिका

जोधपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, जोधपुर और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को “विधि और चिकित्सा पर एक दिवसीय हितधारक परामर्श एवं पैनल चर्चा” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा विज्ञान और विधि के बीच समन्वय बढ़ाते हुए अनुसंधान के विधिक विनियमन को मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र से हुआ, जिसमें राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर की कुलगुरु प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर और एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने संबोधित किया। दोनों वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में विधि और चिकित्सा के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस पहल को अंतर्विषयक संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

दो सत्र हुए

कार्यक्रम में राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर ने पेटेंट प्रणाली और चिकित्सा अनुसंधान में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने औषधीय पेटेंट, जनस्वास्थ्य और एकाधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा नोवार्टिस प्रकरण जैसे मामलों के जरिए एंटी-एवरग्रीनिंग प्रावधानों के महत्व को समझाया। पहले सत्र में “मेड-टेक रेगुलेशन्स” विषय पर चिकित्सा उपकरणों के नियमन, रोगी सुरक्षा और अनुपालन व्यवस्था पर चर्चा की गई। वहीं दूसरे सत्र “चिकित्सा एवं बौद्धिक संपदा अधिकार” में नवाचार, पेटेंट, सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यावसायीकरण जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

इच्छामृत्यु विषय पर चर्चा

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण इच्छामृत्यु विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही। इसमें प्रो. संहिता पांडा, प्रो. नरेश नेभनानी, डॉ. भरत पालीवाल, डॉ. राघवेंद्र सिंह शेखावत और डॉ. रंजीत थॉमस सहित विशेषज्ञों ने भाग लिया। पैनल में इच्छामृत्यु से जुड़े नैतिक पहलुओं, मरीज की स्वायत्तता, कानूनी सुरक्षा और भारत में विकसित हो रहे न्यायिक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की गई।

समापन सत्र में दिनभर की चर्चाओं का सार प्रस्तुत करते हुए चिकित्सा संस्थानों, विधि शिक्षण संस्थानों और नियामक एजेंसियों के बीच भविष्य में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों, विधि विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने मे मुख्य भूमिका डॉ. अनुभव गुप्ता (सह आचार्य, एम्स जोधपुर) और डॉ. कनिका ढींगरा (सहायक आचार्य, एन.एल.यू. जोधपुर) और सहायक भूमिका में एम्स जोधपुर से मुकेश कुमार गुडेसर, महावीर प्रसाद वैष्णव, लक्ष्मी नारायण चौरसिया और भरत सैन एवं एनएलयू जोधपुर से संजय जोशी एवं भवानी चारण की रही ।