11 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ‘हुक्का-पानी बंद’ जैसे सामाजिक बहिष्कार असंवैधानिक

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने सामाजिक बहिष्कार और स्वयंभू जाति पंचायतों की ओर से दिए जाने वाले फरमानों को गंभीर सामाजिक समस्या बताया। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि हुक्का-पानी बंद जैसे सामाजिक बहिष्कार असंवैधानिक है।

2 min read
Google source verification
Rajasthan High Court big decision social boycott like hookah-paani bandh is unconstitutional

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने सामाजिक बहिष्कार और स्वयंभू जाति पंचायतों की ओर से दिए जाने वाले फरमानों को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए राज्य सरकार को इस पर प्रभावी कार्रवाई करने का सुझाव दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे फरमान किसी व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार हैं और कानून के शासन में इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीश फरजंद अली की एकल पीठ ने कई याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि स्वयंभू जाति पंचायतों की ओर से लोगों पर सामाजिक बहिष्कार, भारी जुर्माना और मानसिक उत्पीड़न जैसे दंड थोपे जा रहे हैं तथा पुलिस में शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि कई मामलों में यह सामने आया है कि बिना किसी वैधानिक अधिकार के स्थानीय जाति पंचायतें समानांतर न्याय व्यवस्था की तरह काम कर रही हैं और लोगों के सामाजिक व नागरिक अधिकारों को प्रभावित करने वाले फरमान जारी कर रही हैं।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि “हुक्का-पानी बंद” जैसे आदेश किसी व्यक्ति को समाज से पूर्ण रूप से अलग-थलग कर देते हैं, जिससे उसकी गरिमा और सामाजिक अस्तित्व पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। ऐसे कृत्य संविधान की ओर से प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकारों के विरुद्ध हैं।

नीति और एसओपी तैयार करने के निर्देश

पीठ ने यह भी कहा कि सामाजिक बहिष्कार की समस्या राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में व्यापक है, लेकिन इसे रोकने के लिए राज्य में कोई विशेष कानून नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने तथा उसे व्यापक रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

महाराष्ट्र की तर्ज पर विशेष कानून बनाने की आवश्यकता

पीठ ने यह भी कहा कि सामाजिक बहिष्कार जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए महाराष्ट्र की तर्ज पर विशेष कानून बनाने की आवश्यकता है, ताकि दोषियों के खिलाफ स्पष्ट आपराधिक प्रावधान और पीड़ितों को प्रभावी संरक्षण मिल सके।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश

1- सुप्रीम कोर्ट के शक्ति वाहिनी मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का सभी संबंधित अधिकारी सख्ती से पालन करें।
2- सामाजिक बहिष्कार, खाप या जाति पंचायतों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए राज्य स्तर पर स्पष्ट नीति और एसओपी तैयार की जाए।
3- तैयार की गई नीति और एसओपी को सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों तक व्यापक रूप से प्रसारित किया जाए और उसके बारे में जन-जागरूकता भी सुनिश्चित की जाए।
4- राज्य सरकार की ओर से ऐसे मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।