जोधपुर

इतिहास के झरोखे से: जोधपुर की इस झील को इंतजार है कायाकल्प का..

- लगातार प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है पर्यटन स्थल  

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kaylana jodhpur

जोधपुर . दशकों से शहरवासियों की प्यास बुझाने वाले कायलाना को अपने कायाकल्प का इंतजार है। कायलाना को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकारों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार विकास की योजनाएं बनाई, लंबी चौड़ी घोषणाएं भी की, लेकिन अब तक सभी कागजी ही साबित हुई हैं। वन विभाग की ओर से शहरवासियों के लिए जंगल सा नजारा पेश करने के लिए २०१२ में बायोडाइवर्सिटी पार्क की परियोजना के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने तो ढाई करोड़ की राशि भी जारी कर दी, लेकिन सरकार बदलते ही परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। कुछ अर्से पहले जेडीए ने भी कायलाना क्षेत्र के विकास के लिए लंबी चौड़ी पर्यटन विकास की घोषणा की लेकिन छह माह बाद भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाई है। उल्लेखनीय है इंदिरा गांधी नहर केनाल से जुड़ी कायलाना झील का पानी शहरवासियों की प्यास बुझाने में प्रयुक्त होता है।

शाम होते ही जमती है महफिल
कायलाना झील के किनारे सूर्यास्त होते ही शराबियों की जाम छलकने लगते हैं। कई युवा हाथों में शराब की बोतलें लिए झील के किनारे बैठकर हुड़दंग मचाते हैं। क्षेत्र में पुलिस गश्त के अभाव में शहरवासी भी परिजनों के साथ शाम के समय जाने से घबराते हैं। क्षेत्र में अंधेरा होने के कारण शाम को दुपहिया वाहन चालक भी क्षेत्र से गुजरने से कतराते है। कायलाना के पास ही में शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल माचिया जैविक उद्यान आने वाले पर्यटक भी सुविधाओं के अभाव में लगातार दूर होते जा रहे है।

नगरीय परिवहन सुविधा का अभाव

शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शुमार कायलाना के लिए जिला प्रशासन की ओर से दशकों बाद नगरीय परिवहन की सुविधा तक उपलब्ध शुरू नहीं हो सकी है। कायलाना के पास ही मारवाड़ का प्रथम जैविक उद्यान भी है जहां पिछले डेढ़ साल में पांच लाख से अधिक देसी विदेशी पर्यटक आ चुके है।


पिछोला झील की तर्ज पर हो विकास

झीलों की नगरी उदयपुर की पिछोला झील की तर्ज पर कायलाना क्षेत्र को विकसित किया जाए तो कायाकल्प हो सकता है। लंबे अर्से बाद वर्तमान में पर्यटकों के लिए बोटिंग की भी सुविधा शुरू की गई है लेकिन सुरक्षा के अभाव में लोग कायलाना से मुंह मोड़ रखा है। प्रशासन की बेरुखी की मार झेल रहीं कायलाना झील का यही हाल रहा तो भविष्य में पर्यटन स्थल के रूप में वजूद खत्म हो जाएगा।

यह है इतिहास
यह जोधपुर के पश्चिम में स्थित झील लगभग ८ किलोमीटर तक फैली हैं। इसका निर्माण महाराजा प्रताप सिंह के समय १८७२ में शुरू हुआ। उसके बाद जोधपुर के दो शासकों भीम सिंह और तख्तसिंह ने झील के जीर्णोद्धार और विकास में योगदान दिया था। कायलाना झील के सिद्धनाथ छोर के एक हिस्से को तख्तसागर भी कहा जाता है।

Updated on:
15 Oct 2017 02:42 pm
Published on:
15 Oct 2017 02:38 pm