वार्ड सीमा क्षेत्र में जेडीए ने निकाली भूखंड की नीलामी की सूचना
poornima bohra/जोधपुर. जिला परिवहन कार्यालय के पास मुख्य सड़क स्थित एक बहुआवासीय भूखंड के स्वामित्व को लेकर जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम आमने-सामने हो गए हैं। वार्ड 58 की सीमा क्षेत्र में निगम ने जिस भूखंड की करीब दो साल पहले बाउंड्रीबाल बनाकर सुरक्षा का जिम्मा लिया था। जेडीए उस भूखंड को अपना बताकर नीलाम करने जा रहा है। इसके लिए जेडीए ने विज्ञप्ति भी निकाल दी। इसकी जानकारी होने पर, निगम ने नीलामी पर आपत्ति जताई। जेडीए प्रशासन का कहना है कि उसे कोई आपत्ति नहीं मिली है। इसे लेकर राजस्थान पत्रिका के 30 नवम्बर के अंक में 'मुफ्त की मलाई खाने को तैयार जेडीए' समाचार प्रकाशन के बाद जेडीए में हड़बड़ी मच गई।
जेडीए का ये है दावा
जेडीए प्रशासन का दावा किया है कि भदवासिया के खसरा संख्या 78 आरटीओ ऑफिस के पास मुख्य सड़क पर भूखण्ड क्षेत्रफल 5815.71 वर्ग मीटर भूमि जमाबंदी (खेवट)/ खतौनी के अनुसार नामंतकरण संख्या 1089 दिनांक 11 फरवरी, 2011 को आवंटित होने पर राजकीय भूमि राजस्थान सरकार के स्थान पर जेडीए के नाम दर्ज है। इस भूमि पर जेडीए की ओर से 4 अगस्त, 2016 को स्वामित्व का बोर्ड लगाया गया था। इस भूमि का भू-उपयोग आयोजना शाखा की रिपोर्ट के अनुसार आवासीय है, जिसके कारण नियमानुसार ४ दिसम्बर सुबह ११ बजे नीलामी कार्यक्रम रखा गया है। भूमि भदवासिया पटवार हलका पूंजला में है।
निगम का यह दावा
नगर निगम का कहना है कि यह भूखंड सरकारी है और वार्ड सीमा क्षेत्र में नगर निगम के अधीन है। इस भूखंड के स्वामित्व को लेकर निगम की ओर से जेडीए को आपत्ति दे चुका है। जेडीए प्रशासन ने अब तक आपत्ति पर कोई जवाब नहीं दिया है।
नियमानुसार यह होना चाहिए था
जोधपुर में अधिकतर सरकारी भूमि को लेकर विवाद है। जो भूमि जिसके क्षेत्राधिकार में आती है, संबंधित एजेंसी का दायित्व है कि उसका सरकारी रिकॉर्ड आपस में स्थानान्तरित करें, लेकिन जोधपुर में कई जगह सरकारी भूमि रेवन्यू विभाग, जेडीए और नगर निगम सहित अन्य विभागों के बीच फुटबॉल बनी हुई है।
रिकॉर्ड के अनुसार भूखण्ड जेडीए का
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार भूखण्ड जेडीए का है। निगम की ओर से इस सम्बंध में कोई आपत्ति या पत्र नहीं मिला है। निगम आपत्ति भी जताता है, तो यह गलत है। जेडीए ही इसकी नीलामी करेगा।
अरुण पुरोहित, सचिव, जेडीए, जोधपुर
भूखण्ड पर निगम का स्वामित्व
यह भूखण्ड सरकारी है और निगम के अधीन है। लम्बे समय से भूखंड पर निगम का स्वामित्व है। हमने आपत्ति पत्र जेडीए को भेजा है। जेडीए निगम का भूखण्ड नीलाम नहीं कर सकता।
ओमप्रकाश कसेरा, आयुक्त, नगर निगम