इस संस्था से अब तक समाज के करीब 3 हजार से ज्यादा बालक-बालिकाएं लाभान्वित हो चुके है
जोधपुर। माहेश्वरी समाज के बुजुर्गों का ऐसा ग्रुप, जो समाज के विवाह वाले घरों में जाकर शिक्षा के लिए ’नेक’ मांगता है। ’नेक’ से मिली इस सहायता राशि को समाज के आर्थिक दृष्टि से कमजोर व जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए खर्च किया जाता है। समाज में शिक्षा के प्रसार के लिए पैसे की कमी से कोई बच्चा वंचित ना रहे, इस मूलमंत्र की भावना के साथ करीब 63 साल पहले माहेश्वरी छात्रवृत्ति निधि संस्था गठित की गई।
इस संस्था से अब तक समाज के करीब 3 हजार से ज्यादा बालक-बालिकाएं लाभान्वित हो चुके है। गत वित्तीय वर्ष में करीब 180 बच्चों को 18 लाख रुपए की सहायता दी गई। संस्था के आय का मुख्य स्त्रोत शादी-विवाह के अवसर पर प्राप्त सहयोग रहा है। माहेश्वरी छात्रवृत्ति निधि संस्था का कार्यालय आरंभ से ही भीतरी शहर में हटड़ियों के चौक में रहा। वर्ष 1960 में इसके प्रथम सचिव गोपीकिशन मच्छर व कोषाध्यक्ष जयकिशन राठी बने।
विवाह वाले घरों में जाते है
संस्था के इस उद्देश्य को साकार करना सरल कार्य नहीं था। इसके लिए एक व्यवस्था विकसित की गई कि समाज के परिवारों के मांगलिक अवसरों विशेषकर विवाह हुए हो, संबंधित परिवार में खुशी का माहौल हो, तब उनके घर जाकर उन्हें बधाई देकर शिक्षा के इस पुनीत कार्य के लिए आर्थिक सहयोग मांगा जाए। यह व्यवस्था काफी सकारात्मक रही छात्रवृत्ति निधि का काम चलने लगा।
साल दर साल बढ़ती गई संख्या
&संस्था से लाभान्वित होने वालों की संख्या सन 1960 के दशक से जहां इकाई के अंक में रही। वहीं सन 2020 के दशक में यह संख्या 180-200 रहने लगी। जहां 1960 के दशक में धनराशि की आवश्यकता सैकड़ों में थी, जो अब 2020 के दशक में बढ़कर करीब 20 लाख वार्षिक हो गई है।
डॉ. मदन मोहन भट्टड, अध्यक्ष, माहेश्वरी छात्रवृत्ति निधि संस्था
उच्च पदों पर पहुंची प्रतिभाएं
&संस्था की ओर से प्रतिवर्ष जरूरतमंद बालक-बालिका को गुप्त रूप से दिया जाता है। साथ ही, लाभार्थी अथवा उसके परिवार से सहयोग राशि वापस नहीं ली जाती है। इस संस्था के सहयोग से बच्चों ने ना सिर्फ शिक्षा प्राप्त की है बल्कि सीए, सीएस, एमबीए, वकील, डॉक्टरी, इंजीनियरिंग सहित उच्च पदों जैसी उपलब्धियां प्राप्त की है।
शिवरतन मानधना, माहेश्वरी छात्रवृत्ति निधि संस्था