
जोधपुर . पांच दिन पहले पश्चिम बंगाल के हाशिमारा एयरफोर्स स्टेशन से मिग-२७ (बहादुर) की सेवानिवृत्ति के बाद अब देश में केवल जोधपुर में ही मिग-२७ एयरक्राफ्ट बचा है। इसे भी २०२४ तक धीरे-धीरे कर के रिटायर कर दिया जाएगा। अब राफेल और तेजस इनकी जगह लेंगे। वायुसेना ने २९ दिसम्बर २०१७ को बीकानेर के नाल एयरफोर्स स्टेशन से मिग-२१ (९६ वर्जन) और हाशिमारा से मिग-२७ की विदाई की। खुद एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने बीकानेर में मिग-२१ से अंतिम उड़ान भरी। नाल में अब जगुआर विमान तैनात किए गए हैं।
वर्तमान में केवल जोधपुर स्टेशन पर मिग-२७ की दो स्क्वाड्रन हैं। यहां मिग-२७ का अपग्रेड जेट है, जिसमें ३६ एयरक्राफ्ट हैं। मिग-२७ बहादुर को हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड ने डिजिटलाइज्ड करके अपगे्रड किया था। जोधपुर में मिग-२७ के अलावा सुखोई-३० एमकेआई की एक स्क्वाड्रन है। वर्तमान में देश में मिग-२१, मिग-२७ और मिग-२९ की कुल ९ स्क्वाड्रन मौजूद हैं, जिन्हें धीरे-धीरे २०२४ तक रिटायर कर दिया जाएगा। एक समय भारत के एयरफोर्स बेड़े में कुल मिग श्रेणी के १२०० विमान थे।
कारगिल में दुश्मनों का सफाया किया
तत्कालीन सोवियत यूनियन ने मिग विमान बनाए थे। भारत ने १९६६ में पहला मिग-२१ विमान खरीदा। मिग-२७ विमान १९७५ में आए। इन विमानों ने १९९९ में पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं १३ जून २०१६ को जोधपुर में ही कुड़ी भगतासनी क्षेत्र में मिग-२७ क्रैश हो गया था, जिसमें दो घर क्षतिग्रस्त हुए और तीन लोगों को चोटें आई थीं। रूस ने भारत के अलावा श्रीलंका और कजाकिस्तान को मिग-२७ बेचे थे।
42 की जगह 31 स्क्वाड्रन
देश में वायुसेना की ४२ स्वीकृत स्क्वाड्रन हैं। इनमें से वर्तमान में केवल ३१ स्क्वाड्रन ही बची हैं। इनमें सुखोई-३० की १० स्क्वाड्रन, ब्रिटिश जगुआर की ६ स्क्वाड्रन, फ्रंास के मिराज-२००० की दो स्क्वाड्रन और मिग-२९ की तीन स्क्वाड्रन शामिल हैं। भारत में वर्तमान में फ्रांस से राफेल विमान की दो स्क्वाड्रन खरीद रहा है। पहला विमान पिछले साल सितम्बर में अंबाला में आ गया था। वहीं २०२२ तक सभी ३६ विमान आ जाएंगे। तीसरी स्क्वाड्रन खरीदने पर वह जोधपुर में तैनात की जाएगी।