Jodhpur Nagar Nigam Budget 2026: नगर निगम का 1469 करोड़ का बजट जारी, शहर एकीकृत सफाई व्यवस्था की घोषणा, निगम एकीकरण के बाद बढ़े क्षेत्रफल को ध्यान में रखकर प्रावधान, पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 60 लाख रुपए तक की अनुशंसा शक्ति
जोधपुर। नगर निगम की प्रशासक एवं संभागीय आयुक्त ने गुरुवार को 1469 करोड़ रुपए का वार्षिक बजट पेश किया। नगर निगम के एकीकरण के बाद पहली बार पेश हुए इस बजट में शहर के विस्तारित क्षेत्रफल और बढ़ती जरूरतों को केंद्र में रखा गया है। पूर्व में निगम का क्षेत्रफल 234 वर्ग किलोमीटर था, जो अब बढ़कर 290 वर्ग किलोमीटर हो गया है। बजट को अब राज्य सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
संभागीय आयुक्त डॉ. प्रतिभा सिंह ने बताया कि इस बजट का फोकस सफाई व्यवस्था के एकीकरण, डिजिटल पारदर्शिता, ट्रैफिक प्रबंधन, हरित ऊर्जा और खेल सुविधाओं के विस्तार पर है। निर्वाचित होकर आने वाले पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 60 लाख रुपए तक की अनुशंसा का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि नगर निगम के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब निगम ने बजट तो पेश किया, लेकिन बजट की कॉपी नहीं दी गई।
गत वर्ष के मुकाबले इस बार करीब 112 करोड़ कम का बजट जारी किया गया है। गत वर्ष निगम उत्तर और दक्षिण दोनों मिलाकर 1581 करोड़ का बजट जारी किया गया था, लेकिन इस बार निगम की ओर से घाटे का बजट पेश किया गया है। इस बात को लेकर अधिकारियों के बीच चर्चा बनी रही। अधिकारियों का कहना था कि नए क्षेत्र शामिल होने के बाद भी घाटे का बजट दिया गया है।
जोधपुर शहर में अब तक डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, जेसीबी, ट्रैक्टर और डंपर जैसे कार्यों के लिए अलग-अलग करीब 20 वेंडर कार्यरत थे। नए बजट में इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू करते हुए प्राइमरी कलेक्शन से लेकर अंतिम निस्तारण तक की जिम्मेदारी एक ही वेंडर को दी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, मॉनिटरिंग आसान होगी और निगम का खर्च घटेगा।
कचरे के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जोन में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे केरू डंपिंग स्टेशन पर कचरे का दबाव कम होगा और उपयोगी सामग्री का पुन: उपयोग संभव हो सकेगा।
निगम क्षेत्र की करीब एक लाख भूमि फाइलों में से 22 हजार का डिजिटलाइजेशन हो चुका है। शेष रिकॉर्ड के लिए 11 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। डिजिटल रिकॉर्ड से प्लॉट, खाली जमीन और भवनों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। इससे फर्जीवाड़ा और अवैध कब्जों पर रोक लगेगी।
बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए विभिन्न जोन में नए पार्किंग स्थलों का चिन्हीकरण कर उन्हें निगम की ओर से विकसित किया जाएगा। इससे बाजार और व्यस्त इलाकों में जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है। इसके लिए शहर की 60 फीट सड़कों पर फुटपाथ छोड़कर पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी।
राजस्थान सरकार की घोषणा के तहत पीपीपी मोड पर ईवी और सीएनजी स्टेशन विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में 10 स्थानों पर कार्य प्रगति पर है, जबकि बजट में 30 नए ईवी चार्जिंग स्टेशन प्रस्तावित हैं। शहर के सात प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी ये स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
खेलों को बढ़ावा देने के लिए 15 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का प्रस्ताव बजट में शामिल किया गया है। उम्मेद क्लब और गांधी मैदान के पीछे निर्माण कार्य जारी है। साथ ही दो प्रमुख सड़कों को आदर्श मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनमें चौड़ीकरण, फुटपाथ और पौधरोपण शामिल होंगे। ये कार्य भी पीपीपी मोड पर होंगे।
सीवरेज के गंदे पानी के उपचार के लिए सालावास एसटीपी परियोजना में 75 करोड़ रुपए कम खर्च होने का दावा किया गया है। निगम के एकीकरण से पूर्व के 160 वार्डों का प्रशासनिक खर्च भी कम होगा।
बजट बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए निगम अधिकारियों ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि एयरपोर्ट की जमीन के मिले 93 करोड़ रुपए किन विकास कार्यों या नए क्षेत्रों के विकास में खर्च किए जाएंगे या नहीं। हालांकि इस बात पर सहमति जरूर दी गई कि नए क्षेत्रों में विकास की संभावना ज्यादा है। इसके लिए खाका तैयार किया गया है, लेकिन उसे अभी जारी नहीं किया गया है।