
फाइल फोटो पत्रिका
PM Crop Insurance Scheme : राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नागौर जिले के कमेड़िया पटवार क्षेत्र के किसानों के बीमा दावों के भुगतान से जुड़े मामले में नागौर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की याचिकाएं खारिज कर दी। साथ ही किसानों की याचिकाएं स्वीकार करते हुए बैंक को हाई लेवल कमेटी के आदेशों की पालना में आठ सप्ताह में बीमा दावा राशि का ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकल पीठ ने पाया कि किसानों के पटवार क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर कमेड़िया के स्थान पर गलती से खेरात दर्ज कर दिया गया। इसके चलते वर्ष 2020 की खरीफ फसल के नुकसान के बाद भी किसानों के बीमा दावे तकनीकी आधार पर लंबित रह गए। किसानों की ओर से अधिवक्ता रामदेव पोटलिया ने पैरवी की।
पीठ ने कहा कि खरीफ 2020 में अल्प बारिश से फसल को नुकसान हुआ और बीमा दावा सिर्फ पोर्टल पर गलत प्रविष्टि के कारण नहीं निस्तारित किया गया। किसान पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर होते हैं, उनकी न तो पोर्टल तक पहुंच है और न ही डेटा एंट्री पर कोई नियंत्रण है। इसलिए ऐसी गलती की सजा किसान नहीं भोग सकते।
मामले में बैंक ने दलील दी कि उसकी भूमिका केवल मध्यस्थ की है और गलत जानकारी सहकारी समिति से आई थी, इसलिए बैंक पर भुगतान की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।
पीठ ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया और कहा कि योजना के दिशा-निर्देशों के तहत बैंक पर डेटा अपलोड करने से पहले प्रविष्टियों की जांच और पुनः जांच का दायित्व है। बैंक अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए पूरा दोष सहकारी समिति पर नहीं डाल सकता।
कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को समय पर राहत देना है। ऐसे में बैंक की तकनीकी गलती के आधार पर किसानों को लाभ से वंचित करना योजना की मूल भावना के विपरीत है।
Updated on:
19 Feb 2026 10:24 am
Published on:
19 Feb 2026 09:43 am
