मेहरानगढ़ में सुबह 7 से शाम 5 बजे तक हो सकेंगे मां चामुण्डा के दर्शन
जोधपुर. मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना-आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र बुधवार को घरों व मंदिरों में घट स्थापन के साथ ही शुरू हो गया है। सूर्यनगरी के सभी प्रमुख नवदुर्गा मंदिरों में नवरात्र पूजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मेहरानगढ़ स्थित प्राचीन चामुंडा मंदिर में दर्शनार्थियों के सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई हैं। माता के श्रद्धालुओं का तांता सुबह से ही यहां देखने को मिल रहा है। भक्त लंबी कतारों में लग कर माता के दर्शनों के लिए आने लगे हैं। 2008 में हुए हादसे के बाद पहली बार बड़ी संख्या में युवाओं का हुजूम देखने को मिला।
मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के निदेशक करणीसिंह जसोल ने बताया कि किले के मुख्य प्रवेश द्वार जयपोल एवं शहरी छोर स्थित फतेहपोल के प्रवेश द्वार सुबह 7 बजे से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। प्रशासन के निर्देशानुसार शाम 5 बजे तक ही मंदिर में दर्शन किए जा सकेंगे। जयपोल से चामुण्डा मंदिर तक एक पंक्ति लाइन दर्शन व्यवस्था रहेगी। चामुण्डा मंदिर में सतवर्ती पाठ का संकल्प और स्थापना का मुहूर्त सुबह 11.15 से 12.15 के बीच रहेगा । चामुण्डा मंदिर के पास ‘उपासनालय’ कक्ष में 17 अक्टूबर को अष्टमी की रात हवन प्रारंभ होगा, जिसकी पूर्णाहुति महानवमी 18 अक्टूबर को सुबह 11.15 से 11.55 बजे के बीच होगी। चामुण्डा मंदिर पुजारी घनश्याम त्रिवेदी ब्रह्म मुहूर्त में मां चामुण्डा, मां कालकाजी, मां सरस्वती एवं बेच्छराजजी की मूर्तियों का जलाभिषेक कर नई पोशाक धारण करवाएंगे। सुबह मंदिर शिखर पर मुख्य ध्वजा चारों दिशाओं में छोटी-छोटी ध्वजाएं चढ़ाई जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मेहरानगढ़ में करीब 55 क्लोज सर्किट टीवी कैमरे व नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। प्रसाद चढ़ाने के लिए बसन्त सागर पर महामृत्युंजय मूर्ति वाले मार्ग पर पुरुषों के लिए एवं प_े पर महिलाओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।
संवित् धाम में नवरात्रि आज
स्वामी ईश्वरानन्द गिरि स्थापित दईजर लाछा बासनी स्थित संवित् धाम आश्रम में शारदीय नवरात्र महोत्सव बुधवार सुबह 10.15 बजे भगवती गिरि राजेश्वरी मन्दिर में घट स्थापना के साथ शुरू हुआ। संवित् साधनायन संस्थान के सहसचिव शेखर थानवी ने बताया कि नवरात्र के शेष दिनों में सुबह 6 बजे से श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ हुआ। दुर्गाअष्टमी पर दोपहर 2 बजे से हवन होगा। 16 से 18 अक्टूबर तक तीन दिवसीय देवी शिविर होगा, जिसमें स्वामी संवित् सोमगिरि साधकों को दुर्गासप्तशति पर प्रवचन देंगे। इसी कड़ी में 18 अक्टूबर को सुबह कन्या पूजन व 19 अक्टूबर को घट विसर्जन के साथ नौ दिवसीय अनुष्ठान सम्पूर्ण होगा।