
गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) ( NLU ) जोधपुर ने राज्य विधानसभा की ओर से गत वर्ष 5 मार्च को राजस्थान मूल के विद्यार्थियों के लिए मंजूर 25 प्रतिशत कोटे को लागू नहीं किया है। वजह यह है कि एनएलयू जोधपुर ने दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज मंजू गोयल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया। गोयल कमेटी ने छह महीने बाद भी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। एनएलयू की प्रवेश परीक्षा कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट 26 मई को होगी और जून में एनएलयू कंसोर्टियम वरियता के अनुसार छात्र छात्राओं को देश के 21 एनएलयू में सीटों का आवंटन कर देगा। नतीजा यह कि इस साल भी एनएलयू जोधपुर में राजस्थानियों का हक मारा जाएगा। जबकि देश में 22 एनएलयू में से 18 एनएलयू में स्टेट कोटा है।
जोधपुर एनएलयू की स्थापना 1999 में हुई थी। इसमें पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम बीए एलएलबी और बीएससी एलएलबी के अलावा एलएलएम, मास्टर ऑफ बिजनेस लॉ, एमबीए और पीएचडी भी करवाई जाती है। राज्य सरकार ने स्टेट कोटा देने में 19 साल लगा दिए, जबकि एनएलयू भोपाल, एनएलयू रायपुर और एनएलयू गांधीनगर की स्थापना के साथ ही संबंधित राज्यों के छात्रों को आरक्षण दे दिया गया था। एनएलयू उड़ीसा, एनएलयू बेंगलुरू, एनएलयू जोधपुर और एनएलयू दिल्ली को छोडकऱ सभी लॉ स्कूल्स में संबंधित राज्यों के छात्र-छात्राओं के लिए सीटें आरक्षित हैं। उड़ीसा और कर्नाटक सरकारों ने भी अपने एनएलयू में स्टेट कोटे को मंजूरी दे रखी है लेकिन वहां भी इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
115 में से 29 राजस्थान के होंगे
एनएलयू जोधपुर में स्नातक पाठ्यक्रम की 115 सीटें हैं। स्टेट कोटे को मंजूरी मिलने के बाद कम से कम 29 सीट राजस्थानी मूल के छात्रों के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
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मुझे पता नहीं
‘मुझे इस बारे में पता नहीं, आप रजिस्ट्रार से बात करो।’
- प्रो. पूनम सक्सेना, कुलपति, राष्ट्रीय विधि विवि जोधपुर
प्रक्रिया चल रही है
‘गोयल कमेटी ने रिपोर्ट नहीं दी। कमेटी बने कितना समय हो गया, यह तो पता नहीं। पर स्टेट कोटे की प्रक्रिया चल रही है।’
- सोहनलाल शर्मा, कुलसचिव, राष्ट्रीय विधि विवि जोधपुर