
MGH Jodhpur : प्रतीकात्मक फोटो है, जिसे AI से बनाई है।
Rajasthan : प्रतापगढ़ जिले के निवासी मरीज के लिए महात्मा गांधी अस्पताल, जोधपुर के चिकित्सकों ने नई उम्मीद जगाई। मशीन पर काम करते समय हुए एक गंभीर हादसे में उनका नाजुक अंग शरीर से पूरी तरह अलग हो गया था। दुर्घटना में मूत्राशय को भी गंभीर चोट पहुंची थी। गंभीर स्थिति में मरीज को उपचार के लिए महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।
मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉ. रजनीश गालवा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने जटिल पेनाइल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी की। इस प्रक्रिया में कटकर अलग हुए नाजुक अंग को अत्यंत सावधानी और विशेषज्ञ तकनीक के साथ पुनः जोड़ा गया। यह ऑपरेशन चिकित्सकों के लिए चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि चोट के साथ-साथ मूत्राशय और आस-पास के ऊतकों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा था।
यूरोलॉजी विभाग के डॉ. छंवर लाल ने मूत्राशय की चोट की सफलतापूर्वक मरम्मत की। ऑपरेशन के दौरान मूत्राशय के खुले और क्षतिग्रस्त हिस्से को ढकने के लिए प्लास्टिक सर्जरी से फ्लैप कवर किया गया। इसके बाद नाजुक अंग के शाफ्ट पर स्किन ग्राफ्टिंग की गई, ताकि क्षतिग्रस्त त्वचा और ऊतकों का पुनर्निर्माण किया जा सके। डॉ. रजनीश गालवा ने बताया कि इस प्रकार के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना, तत्काल उपचार और विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इस जटिल एवं बहु-विभागीय सर्जरी में सर्जरी विभाग से डॉ. सोहन जयपाल और डॉ. अवधेश शर्मा ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. राकेश कर्णावत, डॉ. सरिता जनवेजा, डॉ. अनिशा और डॉ. जितेंद्र शामिल रहे। वहीं नर्सिंग अधिकारी अरविंद अपूर्व, दिनेश गालवा और गणपत खींची ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऑपरेशन के बाद मरीज को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। उपचार के दौरान उसकी स्थिति स्थिर रही और स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखा गया।
Updated on:
03 Sept 2026 07:03 pm
Published on:
03 Sept 2026 07:01 pm
