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Jodhpur Weather Update: सूर्यनगरी में मानसून की बारिश थमने के साथ ही मौसम का मिजाज बदलने लगा है। शहर में करीब 23 दिन से बारिश नहीं हुई है और हवा में नमी भी 10 से 15 प्रतिशत तक कम हुई है। इसका असर रात और सुबह के मौसम पर दिखाई देने लगा है।
न्यूनतम तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने, तेज हवा चलने और नमी कम होने से सुबह व देर रात हल्की ठंड का एहसास होने लगा है। खुले और बाहरी इलाकों में ठंडक अधिक महसूस की जा रही है।
बुधवार को शहर का न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.9 डिग्री अधिक था। सुबह करीब 70 प्रतिशत आर्द्रता रही, लेकिन तापमान में कमी और हवा के कारण मौसम सुहावना बना रहा। दिन में तेज धूप निकली और आसमान में ऊंचाई पर हल्के बादल छाए रहे। अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य के करीब रहा।
मौसम में बदलाव का सबसे बड़ा संकेत दिन और रात के तापमान के बीच बढ़ता अंतर है। वर्तमान में तापांतर बढ़कर 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि मानसून के सक्रिय दिनों में यह औसतन करीब 5 डिग्री बना हुआ था। पिछले सप्ताह कई बार न्यूनतम तापमान 26 डिग्री से नीचे या पास रहा, जिससे रात की ठंडक अधिक महसूस हुई।
शहर में अंतिम बार 10 अगस्त को बारिश हुई थी। इसके बाद से बारिश का लंबा अंतराल बना हुआ है और वातावरण धीरे-धीरे शुष्क होने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले करीब 10 दिनों तक जोधपुर में बारिश की कोई खास संभावना नहीं है। सितंबर में मानसून की विदाई का महीना भी है और महीने के अंतिम सप्ताह में क्षेत्र से मानसून की वापसी की परिस्थितियां बनने की संभावना है।
बारिश खत्म होने के साथ दिन और रात के तापमान में अंतर आने की अस्पतालों में खांसी-जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध मथुरादास माथुर अस्पताल में पिछले एक सप्ताह में इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस (आइएलआइ) के मरीज ओपीडी के 20 से 25 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।
प्रतिदिन करीब 700 से 800 मरीजों की फिजिशियन ओपीडी में लगभग 25 प्रतिशत मरीज खांसी-जुकाम की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। रात का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने और सुबह-शाम हल्की ठंडक के कारण खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधी शिकायतें बढ़ी है। उधर बरसात कम होने की वजह से इस बार ग्रामीण इलाकों से सांप काटने के मामले भी कम आए। मच्छर काबू में होने की वजह से डेंगू और मलेरिया के मामले भी गिने-चुने ही रहे।
आइएलआइ के 5 से 7 प्रतिशत मरीज गंभीर स्थिति में होते हैं। इनमें निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं और उन्हें ठीक होने में 10 से 15 दिन लग रहे हैं। गंभीर मामलों में संक्रमण की स्थिति जानने के लिए सीटी स्कैन भी कराना पड़ रहा है। करीब 10 से 15 प्रतिशत मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है, जबकि अधिकांश का उपचार दवा और परामर्श से हो रहा है।
केएन चेस्ट अस्पताल की ओपीडी में भी 20 से 30 प्रतिशत मरीज फ्लू जैसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। यहां सामान्य मरीजों का उपचार किया जा रहा है, जबकि गंभीर मरीजों को एमडीएम अस्पताल भेजा जा रहा है। चिकित्सक मरीजों की स्थिति पर विशेष निगरानी रखे हुए हैं।
Updated on:
03 Sept 2026 12:23 pm
Published on:
03 Sept 2026 12:19 pm
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