प्रत्येक छात्र के लिए गर्मियों में 120 घंटे की समर इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है, जो वह ग्राम पंचायत, एनजीओ, सरकारी कार्यालय, निजी कार्यालय, प्रयोगशाला अथवा किसी संस्थान से कर सकेगा।
राजस्थान के जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक स्तर (छह सेमेस्टर) के पाठ्यक्रम और डिग्री में बड़ा बदलाव किया है। बीए/बीएससी/बीकॉम का कोई भी छात्र कोई भी विषय लेकर एक सेमेस्टर में पढ़ सकेगा। मसलन बीए का छात्र फिजिक्स या केमेस्ट्री ले सकेगा। इसको मल्टीडिसिप्लिन कोर्स कहेंगे।
अब स्नातक (यूजी) में प्रवेश के एक साल बाद अगर कोई छोड़कर जाना चाहता है तो उसे सर्टिफिकेट इन बीए/बीएससी/बीकॉम दिया जाएगा। दो साल में छोड़ने पर डिप्लोमा, तीन साल में डिग्री और चार साल में संबंधित विषय में ऑनर्स मिलेगी।
प्रत्येक छात्र के लिए गर्मियों में 120 घंटे की समर इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है, जो वह ग्राम पंचायत, एनजीओ, सरकारी कार्यालय, निजी कार्यालय, प्रयोगशाला अथवा किसी संस्थान से कर सकेगा। इसके सर्टिफिकेट के क्रेडिट दिए जाएंगे। स्नातक पाठ्यक्रम अब 120 क्रेडिट के स्थान पर 144 क्रेडिट का होगा।
अगर कोई छात्र बीए/बीएससी/बीकॉम डिग्री के बाद एक साल की रिसर्च करता है तो उसकी डिग्री स्नातकोत्तर के समकक्ष मानी जाएगी लेकिन रिसर्च के लिए स्नातक में 75 प्रतिशत मार्क्स लाने जरूरी होंगे।
मल्टीपल डिसिप्लिन कोर्स- इसमें कोई भी छात्र कोई भी विषय ले सकता है लेकिन उसका विषय उसकी 12वीं कक्षा के विषय से हटकर होना चाहिए। यह तीसरे, चौथे व पांचवें सेमेस्टर में पढ़ना होगा।
वेल्यू एडेड कोर्स- लोकतंत्र, दर्शनशास्त्र व समाजशास्त्र के मूल्य सिखाए जाएंगे। यह पहले व दूसरे सेमेस्टर में पढ़ना होगा।
स्कल इनहेसमेंट- इसमें कम्प्यूटर, ब्यूटी पार्लर, टाइपिंग, इंग्लिश स्पिकिंग जैसे कोर्स में दक्ष किया जाएगा। ये तीसरे, चौथे व पांचवें सेमेस्टर में आएगा।
एबिलिटी इनहेंसमेंट- इसमें हिन्दी और अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी। यह पहले व दूसरे सेमेस्टर में आएगा।\
ये चारों विषय छह सेमेस्टर में पास करने होंगे। इन परीक्षा में मल्टीपल चॉइस प्रकार के प्रश्न आएंगे। प्रश्न पत्र दो घंटे का होगा।
नए बदलाव के तहत अब छात्र किसी एक विषय में स्नातक कर पाएंगे। मसलन राजनीतिक विज्ञान में बीए अथवा रसायन शास्त्र में बीएससी। इसके अंतर्गत प्रमुख विषय के दो प्रश्न पत्र होंगे और एक अन्य माइनर विषय के रूप में होगा। वर्तमान में स्नातक में तीन विषय की अवधारणा घटकर दो विषय रह जाएगी।
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कमेटी ने यूजीसी और एनईपी की नई गाइडलाइंस के अनुसार इसी शैक्षणिक सत्र से बदलाव लागू करने के लिए अनुमोदन किया है। आगामी एकेडमिक कौंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। वहां से पास होते ही लागू हो जाएगा।