जोधपुर

फलोदी में भाजपा बहुमत की दहलीज पर, एक सीट ने बढ़ाया निर्दलीयों का ‘भाव’, बोर्ड पर सस्पेंस बरकरार

Phalodi Nagar Parishad Result: फलोदी नगर परिषद के 40 वार्डों के नतीजे सामने आ गए हैं। भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 21 सीटों से एक कदम दूर रह गई। कांग्रेस को 13 और निर्दलीयों को 7 सीटें मिली हैं। ऐसे में बोर्ड गठन की चाबी निर्दलीयों के हाथ में है
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Sep 14, 2026
Phalodi Nagar Parishad Result
Phalodi Nagar Parishad Result (Photo-Patrika)

Phalodi Nagar Parishad Result 2026: नगर परिषद चुनाव में 40 वार्डों की मतगणना पूरी होने के साथ शहर का सियासी गणित साफ हो गया है। भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े 21 से एक सीट दूर रह गई। कांग्रेस ने 13 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि सात निर्दलीय पार्षद चुनाव जीतकर बोर्ड गठन के समीकरणों में अहम हो गए हैं। अब सभी की नजरें इन सात निर्दलीयों के रुख पर टिकी हैं।

दलसीटें स्थिति
भाजपा20सबसे बड़ा दल
कांग्रेस13दूसरे नंबर पर
निर्दलीय7किंगमेकर

बहुमत से एक कदम दूर भाजपा

40 सदस्यीय नगर परिषद में बहुमत के लिए 21 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। भाजपा 20 सीटों के साथ बहुमत से केवल एक सीट दूर है। ऐसे में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए कम से कम एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन हासिल करना होगा। दूसरी ओर, सातों निर्दलीय एक साथ आते हैं तो बोर्ड गठन के समीकरण और भी दिलचस्प हो सकते हैं।

वार्ड 7 का परिणाम रहा खास चर्चा में

वार्ड 7 में कांग्रेस के अशोक व्यास ने कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पूर्व सभापति पन्नालाल व्यास को 50 मतों से हराया। इस परिणाम को फलोदी की स्थानीय राजनीति में अहम उलटफेर माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से सभापति पद के मजबूत दावेदार माने जा रहे श्रीकान्ता मुरलीमनोहर व्यास वार्ड 27 से चुनाव हार गए। वहीं वार्ड 18 से जयप्रकाश बोहरा को भी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की ओर से सभापति पद के दावेदार माने जा रहे मेघराज कल्ला, उनकी पत्नी ममता कल्ला, जेपी जोशी और ओम बोहरा चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। ऐसे में सभापति पद को लेकर भाजपा के भीतर भी दावेदारों के बीच खींचतान देखने को मिल सकती है।

अब सभापति की कुर्सी पर नजर

मतगणना पूरी होने के साथ सभी 40 वार्डों के परिणाम सामने आ गए हैं। अब अगली चुनौती बोर्ड गठन और सभापति के चुनाव की है। भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है, लेकिन बहुमत से एक सीट दूर है। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा। इसके साथ ही सभापति पद के लिए पार्टी के भीतर दावेदारों की स्थिति भी आने वाले दिनों में अहम रहेगी।