
जोधपुर .
इस दुनिया में विफल लोगों को जीने का हक नहीं है। सभी विफल लोगों को मर जाना चाहिए...। ना जाने आजकल बाढ़ या भूकंप इतने कम क्यों आते हैं...। हमारे दो चेहरे होते हैं-एक दया व करुणा का दूसरा क्रोध व क्रूरता का। ये जिंदगी कितनी घिनौनी है। इसमें जीकर क्या करना...। कभी ख्याल आता है आत्म हत्या कर लूं, दूसरे ही पल सोचता हूं दुनिया में आया हूं तो मुझे जीने का पूरा पूरा हक है...।
व्यक्ति के अवसाद व संताप को उजागर करते ये दार्शनिक संवाद रविवार शाम टाउन हॉल में मंचित नाटक 'नदी प्यासी थीÓ के थे। द थर्ड बैल आट्र्स एंड कल्चरल सोसायटी की प्रस्तुति नदी प्यासी थी नाटक के मूल लेखक डॉ. धर्मवीर भारती थे, जिसका निर्देशन उम्मेद भाटी ने किया।
राजेश के पात्र में रंगकर्मी अजयकरण जोशी, डॉ. कृष्णा की प्रेयसी पद्मा के रूप में तथा बाद में राजीव के प्रति आकर्षित होते पात्र के रूप में अनुपमा चौहान ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। अन्य पात्रों में डॉ. कृष्णा बने नवीन रतावा, शंकर के रूप में मो इमरान, शीला के रूप में डॉ. नीतू परिहार व मल्लाह बने भरत वैष्णव ने भी प्रभावित किया।
26 वां ओमशिवपुरी स्मृति नाट्य समरोह 12 से 16 अक्टूबर तक
राजस्थान संगीत नाटक् अकादमी के तत्वावधान में प्रसिद्ध रंगकर्मी व बॉलीवुड स्टार स्व ओम शिवपुरी की स्मृति में 26 वां नाट्य समरोह 12 से 16 अक्टूबर तक टाउन हॉल में आयोजित किया जाएगा। समारोह में जोधपुर, जयपुर व बीकानेर व अलवर के निर्देशकों व कलाकारों द्वारा अभिनीत नाटकों का मंचन किया जाएगा। अकादमी सचिव महेश पंवार के अनुसार समारोह की शुरूआत 12 अक्टूबर शाम 7.30 बजे जोधपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ एसपी रंगा निर्देशित नाटक सांध्य छाया के मंचन के साथ होगी।
समारोह की दूसरी शाम 13 अक्टूबर को बीकानेर के निर्देशक अशोक जोशी के नाटक जब शहर हमारा सोता का मंचन होगा। तीसरी शाम 14 अक्टूबर को जयपुर के सोफायन खान निर्देशित नाटक मच्छकटिकम की प्रस्तुति होगी। वहीं चैथी शाम 15 अक्टूबर को जयपुर के रंगकर्मी सौरभ श्रीवास्तव नाटक आत्मकथा का मंचन करेंगे। जबकि समारोह का समापन 16 अक्टूबर को अलवर के देशराज मीणा के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक उसके इंतजार में के मंचन के साथ होगा।