रानीसर और पदमसर जलाशय से नीचे की तरफ स्थित इस बावड़ी का निर्माण राव चूंडा की सोनगरा रानी चान्दकंवर ने करवाया था।
जोधपुर . प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को अपने मन की बात कार्यक्रम में जल संरक्षण विषय पर विचार व्यक्त किए। इसमें उन्होंने देश की जल परंपरा और यहां के प्राचीन जल संरक्षण से जुड़ी बावडिय़ों आदि स्रोतों का जिक्र किया है। अपने मन की बात में उन्होंने जोधपुर की चांद बावड़ी के बारे में भी बताया है। उन्होंने इस के बारे में कहा कि यदि जोधपुर जाएं तो इस बावड़ी को जरूर देखें। सूर्यनगरी के भीतरी शहर स्थित चांद बावड़ी में राणीसर-पदमसर के ओटे के दौरान तालाब की शिराएं आती हैं। राणीसर के जूने ओटे के दौरान चांद बावड़ी स्वत: भर बाहर आ जाती है। इस जगह का पवित्र जल लोग जलाभिषेक के लिए भी काम में लिया करते थे, लेकिन इन दिनों यह बावड़ी उपेक्षा का शिकार हो रही है। इसमें शराब की बोतलें इत्यादि पड़ी रहने से कई भक्तों और ब्राह्मणों का मोह भंग हो रहा है। जबकि यह जगह लोगों की आस्था की प्रतीक है।
चांद कंवर ने करवाया था निर्माण
रानीसर और पदमसर जलाशय से नीचे की तरफ स्थित इस बावड़ी का निर्माण राव चूंडा की सोनगरा रानी चान्दकंवर ने करवाया था। देख-रेख के अभाव में बावड़ी खस्ता हालत में है।
लोकाचार में महिलाओं के स्नान की जगह
कई साल पहले तक महिलाएं घरों में मौत आदि कार्यों के दौरान स्नान करने चांदबावड़ी आया करती थीं, लेकिन इन दिनों इस जगह पर महिलाएं सार्वजनिक सरकारी नलों के पानी से स्नान कर के काम चला रही है। क्योंकि सरोवर में गंदगी होने से क्षेत्र की महिलाएं स्नान आदि कार्य करने से कतरा रही हैं।
इन दिनों है हालत खराब
चांद बावड़ी की वर्तमान में हालत बहुत खराब है। क्षेत्र वासियों का कहना है कि इसमें सीवरेज का पानी भी आता है और जहां तक पीएम नरेंद्र मोदी ने जल संग्रहण की बात की है तो यह बात जरूर है कि रानीसर-पदमसर ओवरफ्लो यानी ओटे के दौरान यानी यहां पानी जरूर इक_ा होता है। लेकिन वह भी प्रशासन इक_ा नहीं कर पाता है। कुल मिलाकर बावड़ी इतनी बड़ी नहीं है।