
जोधपुर . रंगदारी के लिए सरदारपुरा सी रोड पर मोबाइल व्यवसायी की हत्या के मामले पुलिस ने रविवार को शूटर को पनाह देने के संदेह में कुछ युवकों को पूछताछ के लिए उठाया। फिलहाल पूछताछ जारी है। इधर, हत्यारों का सुराग नहीं लगा है। पुलिस तीन राज्यों में उनकी तलाश कर रही है।
मंडोर से संदिग्ध को ले गई पुलिस
पुलिस ने मंडोर इलाके से रविवार सुबह एक युवक को पुलिस उसके घर से ले गई। उस पर शूटर को पनाह देने का संदेह है। पुलिस इस मामले में अन्य संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही है। फिलहाल हरेन्द्र उर्फ हीरा जाट और पंजाब के मोहाली निवासी काली राजपूत का सुराग नहीं लगा है। उनकी तलाश में पंजाब, हरियाणा व प्रदेश में पुलिस दबिशें दे रही है। स्थानीय स्तर पर किसने इनका सहयोग किया, इस बारे में भी पता किया जा रहा है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि फायरिंग से पहले रैकी करने वाले कौन थे।
यह कैसी नाकाबंदी
पुलिस की नाकाबंदी की पोल फायरिंग की वारदातें खोल रही है। पुलिस का दावा है कि शहर में आठ बार फायरिंग की घटनाएं हुई। हर बार नाकाबंदी की गई, लेकिन एक बार भी फायरिंग करने वाला हाथ नहीं लगा। एेसे में पुलिस के नाकाबंदी के स्तर की पोल खुल रही है।
जोधपुर से एसओजी का लौटाना दुर्भाग्यपूर्ण : गहलोत
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पिछले दिनों जोधपुर में व्यवसायी वासुदेव इसरानी की हत्या के मामले में जांच के लिए जोधपुर पहुंची एसओजी टीम को लौटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे लगता है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया एवं डीजी पुलिस अजीत सिंह शेखावत के बीच तालमेल नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि समाचार पत्रों की खबरों के अनुसार तीन दिन तक पुलिस के संबंधित अधिकारियों द्वारा एसओजी को सहयोग नहीं करना अविश्वसनीय है। स्थानीय पुलिस द्वारा डीजी के आदेश को अनदेखा करना चिंतनीय है तथा यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री का भी प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। गहलोत ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा भी जोधपुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ी टिप्पणियां की गई हैं। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है।