राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जालोर जिले के भीनमाल में तैनात एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी पर गाज गिरी है। राजस्थान हाई कोर्ट ने अनुशासन और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए एक कड़ा प्रशासनिक संदेश दिया है।
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए भीनमाल (जालोर) में पदस्थापित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) राजेंद्र साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देशों पर जारी यह आदेश अब प्रदेश के न्यायिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया हुआ है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई न्यायिक शुचिता बनाए रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
हाई कोर्ट द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, एडीजे राजेंद्र साहू के खिलाफ छह अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोपों की प्रारंभिक जांच चल रही है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निलंबन आदेश जारी किया है।
नियमों के अनुसार, निलंबन के दौरान एडीजे राजेंद्र साहू को पद से अलग रखा जाएगा, लेकिन उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) मिलता रहेगा। यह भत्ता उनके मूलभूत वेतन का एक निर्धारित हिस्सा होता है, जो जांच पूरी होने तक देय होगा।
राजस्थान हाई कोर्ट हाल के वर्षों में न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर काफी सख्त रहा है। यह आदेश स्पष्ट करता है कि पद की गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जोधपुर स्थित हाई कोर्ट मुख्यालय अब इस पूरे मामले की निगरानी करेगा और प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगामी विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
भीनमाल जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक केंद्र पर एडीजे स्तर के अधिकारी का निलंबन होने से स्थानीय वकीलों और वादियों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं। कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई के लिए अब कार्यवाहक व्यवस्था की जाएगी ताकि आम जनता को न्यायिक प्रक्रिया में देरी का सामना न करना पड़े।