
राजस्थान में बेरोजगारी के आंकड़ों ने एक बार फिर डराने वाली तस्वीर पेश की है। निदेशालय रोजगार (Directorate of Employment) द्वारा आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के जिला रोजगार कार्यालयों में 22 लाख 21 हजार 317 अभ्यर्थी नौकरी की तलाश में पंजीकृत हैं। लेकिन सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि पिछले 5 वर्षों में एक भी अभ्यर्थी को रोजगार कार्यालय के माध्यम से सरकारी क्षेत्र में नियुक्ति नहीं मिली है।
RTI से मिले आंकड़ों के अनुसार, 14 जनवरी 2026 तक की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
रोजगार कार्यालयों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में प्लेसमेंट दिलाना है। लेकिन डेटा बताता है कि सरकारी क्षेत्र में पिछले 5 सालों में एक भी भर्ती इनके जरिए नहीं हुई। वहीं, प्राइवेट सेक्टर की स्थिति भी निराशाजनक रही:
श्रेणीवार आंकड़ों (Category-wise data) पर नजर डालें तो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थी सबसे बड़ी संख्या में नौकरी की तलाश में हैं। इसके बाद सामान्य वर्ग (General), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य श्रेणियों का स्थान है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश का हर वर्ग इस समय रोजगार के संकट से जूझ रहा है।
आरटीआई आवेदक चंद्रशेखर गौड़ का कहना है कि पिछले दो दशकों में निजी क्षेत्र में करोड़ों का निवेश हुआ है, लेकिन निदेशालय द्वारा प्रदान की जाने वाली नौकरियां नगण्य हैं। सरकारी क्षेत्र में तो यह प्रक्रिया पूरी तरह ठप सी लगती है। उन्होंने मांग की है कि रोजगार कार्यालयों को फिर से सक्रिय किया जाए और वहां से अभ्यर्थियों को सीधा रेफर करने की प्रणाली बहाल हो।
इस मामले पर निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि विभाग पाक्षिक रूप से 'रोजगार संदेश' प्रकाशित करता है ताकि युवाओं को विभिन्न सरकारी रिक्तियों की जानकारी मिल सके। साथ ही, समय-समय पर रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि ये प्रयास 22 लाख युवाओं की फौज के सामने 'ऊंट के मुंह में जीरा' साबित हो रहे हैं।
Updated on:
18 Mar 2026 12:03 pm
Published on:
18 Mar 2026 12:03 pm
