अर्थात 80 प्रतिशत फैकल्टी के भर्ती की जरूरत है।
जोधपुर. दिनोंदिन बढ़ रही मरीजों की संख्या के अनुसार चिकित्सकों की संख्या प्रदेशभर में नगण्य हैं। ऐसे में लगातार बढ़ रहे भार के चलते न केवल चिकित्सकों के कार्य करना कठिन साबित हो रहा है। वरन मरीजों की कतारें लंबी होती जा रही हैं। आए दिन मौसमी बीमारियों सहित बड़े रोगों के इलाज के लिए मरीज परेशान होते दिख जाते हैं। वहीं वरिष्ठ चिकित्सकों सहित रेजिडेंट डॉक्टर्स भी दिन-रात मरीजों के चेकअप में जुटे हैं। इस बीच सबसे अधिक मांग चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने की उठ ही है।
हालांकि प्रदेशभर में 6 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इससे जुड़े विभिन्न छोटे-बड़े अस्पतालों में चिकित्सक अपनी सेवाएं लगातार दे रहे हैं। विभिन्न शिफ्ट्स में काम कर रहे चिकित्सकों स्टाफ बढ़ाए जाने की उम्मीद है। यही नहीं चिकित्सकों सहित नर्सिंग स्टाफ की भी मांग अर्से से की जा रही है। वरिष्ठ चिकित्सकों की बात पर गौर करे तों मालूम पड़ता है कि प्रदेशभर के कॉलेजों को लगभग 3 हजार से अधिक चिकित्सकों की और आवश्यकता है। इस पूर्ति के साथ ही आमजन के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है और सभी प्रकार की योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सकता है।
तीन गुना चिकित्सकों की जरूरत
जानकारों ने बताया कि 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों सहित एक आरयूएचएस का कॉलेज भी संचालित हो रहा है। राज्य के चिकित्सकों के ट्रांसफर इन छह कॉलेजों में ही होते हैं। इसके साथ ही विभिन्न जिलों में कई सोसायटियों की ओर से 5 कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। इसमें बाड़मेर और सीकर में बन रहे कॉलेज अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। झालावाड़ में संचालित कॉलेज पीपीपी मोड पर चल रहा है। सरकार का जो प्लान है हर जिले में कॉलेज खोलने का उसके अनुसार अभी के अनुसार से तीन गुना अधिक चिकित्सकों की आवश्यकता है। अर्थात 80 प्रतिशत फैकल्टी के भर्ती की जरूरत है।
इन मामलों में मिलेगी राहत
नए कॉलेजों की शुरुआत होने से वर्तमान में कार्य कर रहे चिकित्सकों पर भार कम होगा।
चिकित्सक-मरीज के परिजनों के बीच होने वाले झगड़े कम होंगे।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सकेगा।
लंबित ऑपरेशन आदि इलाज समय पर हो सकेंगे।
मौसमी बीमारियों सहित वायरस अटैक के समय व्यापक स्तर पर मेडिकल सुविधा मुहैया करवाई जा सकेगी।
अधिक कॉलेज खुलने से मेडिकल के विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सकेगा।
दूरस्थ रहने वाले मरीजों को समीप के अस्पतालों में बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
वरिष्ठ चिकित्सकों का कार्यभार कम होने से वे नए चिकित्सकों को अधिक जानकारी दे सकेंगे आदि।