Rajasthan Industrial Crisis: देशभर की रिफाइनरियों से मिलने वाला कच्चा माल अटकने और क्रूड ऑयल की कमी के चलते औद्योगिक क्षेत्र में बड़े संकट की आहट हो चुकी है। जिसका सबसे ज्यादा असर राजस्थान के लाइम उद्योग पर पड़ा है।
जोधपुर। ईरान-इजराइल युद्ध की तपिश अब राजस्थान के उद्योगों को झुलसाने लगी है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बाधित आपूर्ति और रिफाइनरियों से पेटकोक (पेट्रोलियम कोक) का मिलना बंद होने के कारण प्रदेश का लाइम उद्योग बंद होने की कगार पर है। जोधपुर सहित राज्य की करीब 400 इकाइयों में उत्पादन 50 प्रतिशत तक गिर गया है। जिससे न केवल करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्टील, फार्मा, शुगर और पेपर जैसे बड़े उद्योगों का पहिया भी थमने लगा है।
राज्य में प्रतिमाह एक लाख 10 हजार टन लाइम प्रोसेस होता है। हर माह करीब एक लाख टन पेटकोक की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में 60 से 70 प्रतिशत तक आपूर्ति कम हो गई है। इनमें उत्पादन 50 प्रतिशत से कम हो गया है और यह देशभर के उद्योगों के पहिए पर भी असर डाल रहा है।
पेटकोक का भाव करीब 2800 रुपए प्रति टन बढ़कर 17,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गया है, जिससे उत्पादन लागत में तेजी से इजाफा हुआ है। इस संकट का असर केवल लाइम उद्योग तक सीमित नहीं है। फार्मा, स्टील, टेक्सटाइल, पेपर और शुगर जैसे उद्योग पर भी पड़ रहा है।
पेटकोक रिफाइनरियों से निकलने वाला ठोस ईंधन है, जिसका उपयोग लाइम, सीमेंट और कई अन्य उद्योगों में ऊर्जा स्रोत के रूप में होता है। इसकी ऊंची कैलोरी वैल्यू के कारण यह उद्योगों के लिए किफायती और प्रभावी ईंधन माना जाता है।
पेटकोक की कमी का असर लाइम उद्योग पर साफ दिख रहा है। लाइम उद्योग ही प्रभावित नहीं होगा, इससे कई बड़े सेक्टर का चक्र भी धीमा पड़ सकता है। -मेघराज लोहिया, अध्यक्ष, ऑल इंडिया लाइम मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन
लाइम उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रमुख ईंधन पेटकोक की कमी से लाइम उत्पादन भी करीब आधा हो गया है। सप्लाई नहीं सुधरी तो कुछ दिन में अन्य उद्योग बुरी तरह प्रभावित होंगे। -सोनू भार्गव, लाइम उद्यमी