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श्रीगंगानगर। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों के बाद अब प्लास्टिक पैकिंग सामग्री के दामों में 50 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई है। इससे व्यापारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी सीधा आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार पहले प्लास्टिक पैकिंग सामग्री करीब 140 रुपए प्रति किलो के हिसाब से उपलब्ध थी, जो अब बढ़कर लगभग 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का असर उन सभी उत्पादों पर पड़ रहा है जो प्लास्टिक पैकिंग में बिकते हैं। उदाहरण के तौर पर 200 एमएल पानी की बोतल 5 रुपए से बढ़कर 6 रुपए तक पहुंच गई है, वहीं शरबत की बोतलों के दाम भी 165 रुपए से बढ़कर 170 रुपए तक हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के चलते पेट्रोकेमिकल सप्लाई प्रभावित हुई है। प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाले ग्रेन्यूल्स (छोटे दाने) की आपूर्ति कम हो गई है। इन्हीं ग्रेन्यूल्स से शॉपिंग बैग, फूड पैकिंग, दूध पाउच, डिटर्जेंट बोतल, क्रेट, अनाज बैग और पानी व सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलें तैयार होती हैं। कच्चे माल की कमी के कारण इन सभी उत्पादों की लागत बढ़ रही है।
बाजार में काजू, पिस्ता और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स प्लास्टिक बॉक्स में बेचे जा रहे हैं। इन बॉक्स की कीमत 14 रुपए से बढ़कर सीधे 20 रुपए हो गई है। ऐसे में आने वाले समय में ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ना तय माना जा रहा है।
प्लास्टिक पैकिंग सामग्री महंगी होने का असर अन्य उत्पादों पर भी पड़ा है। प्लास्टिक के गिलास और कटोरी 5 से 10 रुपए प्रति बंडल तक महंगे हो गए हैं। हालांकि राज्य सरकार की ओर से प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध है, फिर भी बाजार में इनका उपयोग जारी है और इनके दाम भी बढ़ गए हैं।
सूरतगढ़ के व्यापारी राहुल गाबा का कहना है कि खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के कारण प्लास्टिक पैकिंग महंगी हो गई है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है। इससे न केवल व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
Published on:
29 Mar 2026 08:04 pm
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