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”Black Tiger” Ravindra Kaushik : राजस्थान के इस ‘धुरंधर’ ने फेरा था PAK के मंसूबों पर पानी, 18 साल झेली यातनाएं- ऐसे कामयाब रहा था ‘मिशन’

देश के लिए जासूसी कर रहे रवीन्द्र ने घरवालों को कभी इस बात की भनक तक नहीं लगने दी कि वह कहां रह रहे हैं और क्या कर रहे हैं।

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श्री गंगानगर

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Nakul Devarshi

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Mangesh Kaushik

Mar 28, 2026

चर्चित फिल्म 'धुरंधर' में रॉ एजेंट हमजा का किरदार काफी हद तक रवीन्द्र कौशिक से प्रेरित है, जिन्होंने पाकिस्तान जाकर देश के लिए खुफिया जानकारी जुटाई और कई ऑपरेशनों में मदद की। श्रीगंगानगर में 11 अप्रेल 1952 को जन्मे रवीन्द्र कौशिक के जीवन में अहम मोड़ तब आया, जब वे स्कूल के वार्षिकोत्सव में भारत-चीन युद्ध के बाद चीनी सेना के हत्थे चढ़े एक भारतीय सैनिक को दी गई यातनाओं का अभिनय कर रहे थे।

उनका अभिनय रॉ के एक अधिकारी को इतना भाया कि उसी अधिकारी ने रवीन्द्र का परिचय जासूसी की दुनिया से करवाया और कड़े प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक मिशन पर पाकिस्तान भेज दिया। मिशन कामयाब रहा और रवीन्द्र को 'ब्लैक टाइगर' का तमगा मिला। आइबी के पूर्व संयुक्त निदेशक एम. के. धर की लिखी किताब मिशन टू पाकिस्तान रवींद्र कौशिक की ही कहानी है।

पंजाब से खत्म कराया आतंकवाद

पंजाब में आतंकवाद को समाप्त कराने में रविन्द्र का योगदान अहम रहा। दरअसल पंजाब में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के कमांडरों की बातचीत के आधार पर रविन्द्र ने भारत सरकार को बताया कि पंजाब को भारत से अलग करने की साजिश चल रही है। पहले तो इस पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन भारत के दो मित्र देशों की खुफिया एजेंसियों ने इसकी पुष्टि की। तब सरकार ने पंजाब में आतंकवाद के खात्मे की योजना पर गंभीरता से विचार शुरू किया। इसके लिए सेना को ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाना पड़ा।

घरवालों को भनक तक नहीं

सेना की नौकरी करते हुए रवीन्द्र ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम सहित कई महत्वपूर्ण सूचनाएं भारत को दीं। देश के लिए जासूसी कर रहे रवीन्द्र ने घरवालों को कभी इस बात की भनक तक नहीं लगने दी कि वह कहां रह रहे हैं और क्या कर रहे हैं।

दुबई या अन्य देशों से होते हुए जब भी वह घर आते, तो यही कहते कि उन्हें दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी मिली है और काम के सिलसिले में विदेशों में भी जाना पड़ता है।

वापसी से एक दिन पहले पकड़े गए

पंजाब को अलग करने की सूचना देने के बाद रवीन्द्र को वापसी का इशारा मिल चुका था। वर्ष 1983 में भारत वापसी से एक दिन पहले लाहौर में पाकिस्तानी सेना ने रवीन्द्र को जासूसी के आरोप में पकड़ लिया। उन्हें फांसी की सजा हुई, जो बाद में उम्रकैद में बदल गई। अमानवीय यातनाओं के साथ रवीन्द्र ने 18 साल पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में यातनाएं झेलते हुए गुजारे। पाकिस्तान की मियांवाली सेंट्रल जेल में 21 नवंबर 2001 को भारत के इस जांबाज जासूस ने आखिरी सांस ली। तब उनकी उम्र 49 साल थी।

नया नाम नबी अहमद, जिया के चहेते

खुफिया एजेंसी ने रवीन्द्र को 1975 में एक अन्य टारगेट दिया। देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून उन्हें दोबारा पाकिस्तान ले गया। इस बार पाकिस्तान में उन्हें नबी अहमद नाम मिला और पाक सेना में नौकरी भी मिली। सेना में अधिकारी होने के नाते नबी अहमद उर्फ रवीन्द्र की शादी भी एक रईस खानदान की लड़की अमानत से हुई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे जनरल जिया, जब फौज में थे, तब रवीन्द्र उनके चहेते अफसरों में से एक थे

जन्म : 11 अप्रेल 1952 (श्रीगंगानगर)

निधन : नवंबर 2001 (पाकिस्तान)

शिक्षा : श्रीगंगानगर के बिहानी कॉलेज से बी.कॉम।

परिवार : पिता जेएन कौशिक, मां अमला देवी, भाई राजेश्वर, बहन शशि

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