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राजस्थान का अनूठा नशा मुक्त गांव: न तंबाकू खाते लोग, एक भी शराब का ठेका नहीं, 20 वर्षों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं

Sunday Inspirational Story: सरहद के उस इलाके में, जहां नशे की तस्करी और युवाओं में बढ़ती लत चिंता का कारण बनी हुई है, वहीं एक छोटा सा गांव उम्मीद की मिसाल बनकर उभरा है। ग्राम पंचायत खाटां का गांव 35 पीएस न केवल पूरी तरह नशामुक्त है, बल्कि पिछले कई दशकों से अपनी इस परंपरा को सख्ती से निभा रहा है।

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Raisinghnagar

फोटो: पत्रिका

Rajasthan's Unique Village 35 Ps: भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से सटे राजस्थान के एक छोटे से गांव ने समाज के सामने एक अनोखी मिसाल पेश की है। ग्राम पंचायत खाटां के अंतर्गत आने वाला गांव 35 पीएस पूरी तरह नशामुक्त है। यहां के लोग कई दशकों से नशे से दूरी बनाए रखने की परंपरा का सख्ती से पालन कर रहे हैं। ऐसे समय में जब सीमावर्ती इलाकों में नशे की तस्करी और युवाओं में बढ़ती लत चिंता का विषय बनी हुई है, यह गांव सकारात्मक सोच और सामाजिक जागरूकता की मिसाल बनकर उभरा है।

नशे से पूरी तरह दूरी

करीब 50 परिवारों और लगभग 300 की आबादी वाले इस गांव में धूम्रपान करना तो दूर, लोग तंबाकू को छूना भी अपनी संस्कृति के खिलाफ मानते हैं। गांव में शराब का एक भी ठेका नहीं है। ग्रामीण सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि गांव में किसी भी प्रकार का नशा न पहुंचे। यही कारण है कि यहां का वातावरण पूरी तरह स्वस्थ और शांतिपूर्ण बना हुआ है।

20 वर्षों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं

इस गांव की सबसे खास बात यह है कि पिछले करीब 20 वर्षों में यहां के किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में कोई मुकदमा तक दर्ज नहीं हुआ है। यह तथ्य गांव की अनुशासनप्रियता और आपसी समझ का परिचायक है। ग्रामीणों का कहना है कि आपसी विवाद भी आपसी बातचीत और समझ से ही सुलझा लिए जाते हैं।

पीढ़ियों से चली आ रही सीख

गांव के युवा बुटासिंह बताते हैं कि यह बदलाव किसी सरकारी अभियान का परिणाम नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सीख का नतीजा है। बुजुर्गों ने नशे से दूरी को संस्कार के रूप में अपनाया और वही परंपरा आज भी युवाओं तक पहुंच रही है। गांव के अधिकांश युवा अपना समय खेलकूद और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने में बिताते हैं।

खेती, खेल और भाईचारा

गांव के कई युवा रोजगार के लिए विदेशों में भी बस चुके हैं, लेकिन गांव में रहने वाले लोग आज भी आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता के साथ जीवन जीते हैं। खेती यहां का मुख्य व्यवसाय है और ग्रामीण मिलजुलकर सामाजिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। यही एकजुटता इस गांव की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।

सभी ग्रामीण निभाते हैं जिम्मेदारी

गांव के सरपंच रवि पटीर का कहना है कि यहां नशा न करने और न बिकने देने की जिम्मेदारी सभी ग्रामीण मिलकर निभाते हैं। यदि कोई व्यक्ति नशा करने की कोशिश करता है तो उसे समझाकर रोक दिया जाता है। पंचायत समिति प्रधान सुनीता गोदारा के अनुसार 35 पीएस जैसे गांव पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा हैं और उनसे सीख लेकर अन्य क्षेत्रों में भी नशा मुक्ति की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

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