
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई को नवनिर्मित जोधपुर एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया। ये टर्मिनल 23 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और इसमें सालाना लगभग 20 से 25 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता है। यहां 6 एयरोब्रिज, 12 विमान पार्किंग स्टैंड और आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस नए टर्मिनल के शुरू होने से पश्चिमी राजस्थान के विमानन क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी। इस टर्मिनल का निर्माण एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 2023 में दिल्ली की एक कंपनी को सौंपा था। भवन के निर्माण में ग्लास फाइबर रिइनफोर्स्ड कंक्रीट (GFRC) का उपयोग किया गया है। इस एयरपोर्ट टर्मिनल में राजपूताना विरासत और आधुनिक डिजाइन का सुंदर संगम देखने को मिलता है। इसी के साथ टर्मिनल में 3 महीनों में 20 कलाकारों द्वारा तैयार की गई 5 भव्य कलाकृतियों का भी अनावरण किया गया, जो मारवाड़ की संस्कृति, लोकजीवन और ऐतिहासिक धरोहर को दर्शाती हैं।
महज 3 माह में 20 कलाकारों की टीम के साथ जोधपुर हवाई अड्डे के लिए 5 भव्य कलाकृतियां तैयार करने वाले इंदौर के कलाकार महेन्द्र कोडवानी की कला अब देश-दुनिया के यात्रियों का स्वागत करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को नए टर्मिनल भवन के उद्घाटन के साथ इन कलाकृतियों का भी अनावरण करेंगे।
महेन्द्र कोडवानी ने बताया कि जोधपुर हवाई अड्डे के लिए तैयार की गई प्रत्येक कलाकृति मारवाड़ की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को समर्पित है। जोधपुर की आत्मा को समर्पित एक कलात्मक यात्रा, पीकॉक टेल्स : रंग, संस्कृति और मारवाड़ की आत्मा का उत्सव तथा विमान पर विराजमान भगवान शिव : कैलाश से लोककल्याण की दिव्य यात्रा को फाइबर, ठीकरी, कैनवास, टाइल्स, हैंड मोजेक, लकड़ी और कपड़े जैसे मिश्रित माध्यमों से तैयार किया गया है। वहीं खेजड़ली : प्रकृति की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान की अमर गाथा तथा वीर दुर्गादास राठौड़ : साहस, त्याग और स्वाभिमान की अमर गाथा कैनवास पर उकेरी गई हैं।
कोडवानी के अनुसार इन रचनाओं का उद्देश्य केवल एयरपोर्ट को सजाना नहीं, बल्कि जोधपुर आने वाले हर यात्री को राजस्थान की आत्मा से परिचित कराना है। कलाकृतियों में लोकजीवन, मोर, लोकनृत्य, उत्सव, रेगिस्तानी जीवन और स्वागत परंपरा को जीवंत रूप दिया गया है। उनका कहना है कि राजस्थान की पहचान केवल किलों और महलों में नहीं, बल्कि यहां के लोगों, उनकी परंपराओं और लोकसंस्कृति में बसती है। यही भाव इन कलाकृतियों के माध्यम से यात्रियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।