
जोधपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को जोधपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राज्य सरकार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में वास्तविक सत्ता मुख्यमंत्री के हाथ में नहीं है, बल्कि आरएसएस के इशारों पर सरकार चल रही है। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री केवल मुखौटा बने हुए हैं और ट्रांसफर, पोस्टिंग से लेकर भ्रष्टाचार तक के मामलों में फैसले कहीं और से तय हो रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि राजस्थान में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और सरकार पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में भ्रष्टाचार अपनी सीमाएं पार कर चुका है और गांवों से लेकर राजधानी जयपुर तक आम लोग परेशान हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हत्या, दुष्कर्म और डकैती जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
अशोक गहलोत ने पचपदरा रिफाइनरी परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि रिफाइनरी का काम पांच साल तक क्यों रोका गया। उन्होंने कहा कि इस देरी के कारण परियोजना की लागत कई गुना बढ़ गई, जिसका जवाब जनता को मिलना चाहिए। गहलोत ने कहा कि जब केंद्र में डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री और वीरप्पा मोइली पेट्रोलियम मंत्री थे, तब उनके प्रयासों से पचपदरा रिफाइनरी को मंजूरी मिली थी और परियोजना पर काम भी शुरू हो गया था, लेकिन बाद में इसे करीब पांच साल तक रोक कर रखा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि काम रुकने की वजह से परियोजना की लागत में भारी वृद्धि हुई। गहलोत ने कहा कि जो रिफाइनरी करीब 37 हजार करोड़ रुपए में बननी थी, उसकी लागत बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि इस देरी की जिम्मेदारी किसकी है, इस पर प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय पर काम जारी रहता तो परियोजना काफी पहले पूरी हो सकती थी और प्रदेश को इसका लाभ भी मिलने लगता।
उन्होंने कहा कि लागत बढ़ने से सार्वजनिक धन पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री जब राजस्थान आते हैं तो उन्हें प्रदेश की जनता को यह भी बताना चाहिए कि रिफाइनरी परियोजना को वर्षों तक लंबित रखने के पीछे क्या कारण थे और इसके कारण बढ़े खर्च की जिम्मेदारी कौन लेगा।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के सवाल पर गहलोत ने कहा कि राजनीति में बिना तथ्यों के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किरोड़ीलाल मीणा की कार्यशैली लंबे समय से आंदोलन और आरोपों की राजनीति करने वाली रही है। यदि किसी के पास तथ्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए, लेकिन बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या पद की गरिमा पर बार-बार सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान ही नहीं, बल्कि भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी जनता परेशान है। एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकारों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिए जा रहे। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता इन परिस्थितियों का जवाब देगी। हालांकि गहलोत ने यह भी कहा कि उनकी मुख्यमंत्री से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हालात सुधारने के लिए विपक्ष का सहयोग लेना चाहें तो कांग्रेस नैतिक रूप से सहयोग देने को तैयार है। लेकिन इसके लिए सरकार को पहले वास्तविक स्थिति को स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।