जब सलमान खान को जोधपुर में जेल हुई थी सलमान खान को जोधपुर में जेल , शिकार में रिहाई और विदाई हुई थी।
जोधपुर .देश और दुनिया भर में अपने चहेते मशहूर फिल्म अभिनेता सलमान खान के फैन्स के लिए एक खुशखबरी है। जोधपुर की अदालत ने हिरण शिकार के आरोप में तीन दिन और दो रातों से जोधपुर जेल में बंद सलमान खान की जमानत मंजूर कर ली है। इससे सलमान खान के परिवार के साथ-साथ उनके प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सलमान खान की जोधपुर शहर से जुड़ी 20 बरस पुरानी कुछ बातें और कुछ यादें।
जिसने उन्हें शिकारी का टैग दिया
मशहूर फिल्म अभिनेता सलमान खान अपनी फिल्मों और बिग बॉस शो के बाद अब दस का दम को लेकर चर्चा में हैं। वहीं जोधपुर में फिल्म हम साथ-साथ हैं की शूटिंग के दौरान उन पर हिरण का शिकार करने का आरोप लगा। अब कांकाणी शिकार केस में उनकी भूमिका पर फैसला हो गया है। आज हम आपको उस विवाद के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने उन्हें शिकारी का टैग दिया।
तब वे अपने कैरियर के उठान पर थे
जोधपुर में 20 साल पहले हिरण शिकार प्रकरण में आरोपी बने सिने जगत के
मशहूर अभिनेता सलमान खान राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म हम साथ साथ हैं की शूटिंग करने के सिलसिले में जोधपुर आए थे। हिरणों के शिकार के आरोप में जब गिरफ्तार हुए थे तब वे अपने कैरियर के उठान पर थे।
पहला दाग धुल गया
वे 20 बरस पहले धनतेरस पर शिकारी का टैग साथ ले गए थे और सावन में हीरो की छवि के साथ 19 जनवरी 2017 को एक केस में बरी होने पर उन पर लगा शिकारी का पहला दाग धुल गया। बॉलीवुड स्टार सलमान खान,भोपाल के छोटे नवाब
अभिनेता सैफ खान, अभिनेत्री तब्बू, सोनाली बेंद्रे और करिश्मा कपूर व
हास्य अभिनेता सतीश शाह भी शूटिंग के लिए जोधपुर आए थे।
जब शिकार की खबर आई
जोधपुर में 20 साल पहले पहल रात 9.30 बजे प्रारंभिक सूचना आई, फिर दस बजे चर्चा शुरू हुई और बाद में रात के एक बजे थे जब शिकार करने की खबर आई, मीडिया में हरकत हुई और लोग यह सोचने लगे कि क्या सच है और क्या सही है। इन 20 बरसों में कई आरोपी पृष्ठभूमि में चले गए और कइयों को विभिन्न
सुनवाइयों के दौरान कोर्ट में भी देखा गया। उनकी गिरफ्तारी के समय अहम
भूमिका निभाने वाले तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अशोक पाटनी वीआरएस ले कर अब मुबई में रह रहे हैं और कभी कभी जोधपुर आते रहते हैं।
जब सलमान खान पहुंचे जेल, जाते समय अफसरों ने कहा-सॉरी
मुझे याद है कि जब फिल्म के चॉकलेटी हीरो को असली जिंदगी के खलनायक की तरह जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था। यह अपने आप में जुदा केस था।
जोधपुर से उनकी रवानगी का दिन यह शहर आज तक नहीं भूल सकता। यह 18 अक्टूबर 1998 की बात है। जवां दिलों की इस धडक़न के लिए सभी के दिल की धडक़नें बढ़ गई थीं। ( आगे पढ़ें पार्ट 2)
-एम आई जाहिर