जोधपुर

बहस : वन विभाग ने फिल्मी सितारों को झूठा फंसाने के लिए हर स्तर पर किया फर्जीवाड़ा

हिरण शिकार मामले में बचाव पक्ष की बहस आज भी रहेगी जारी  

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RP Bohra/जोधपुर. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला के पीठासीन अधिकारी देवकुमार खत्री के समक्ष बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले में बुधवार को बचाव पक्ष की ओर से दो महीने से जारी अंतिम बहस हुई, जो गुरुवार को भी जारी रहेगी। सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने बहस के दौरान कहा कि वन्यजीव विभाग ने फिल्म अभिनेता सलमान खान, सैफ अली खान , अभिनेत्री नीलम, सोनाली और तब्बू को झूठा फंसाने के लिए हर स्तर पर फर्जी कार्रवाई की।विभाग के प्रविष्टि रजिस्टर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने की तारीख में घालमेल, एसएफएल के लिए हिरण की खाल नहीं भेजना व दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट हाथोंहाथ तैयार करवाना सहित कई ऐसे तथ्य हैं, जो अभियोजन की पूरी कहानी पर संदेह उत्पन्न करते हैं। सारस्वत ने कहा कि गवाह कल्लाराम से पूर्व में की गई जिरह से यह साबित है कि हिरणों का सबसे पहले पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर नेपालिया ने 2 अक्टूबर 98 को रिपोर्ट वन्यजीव अधिकारी मांगीलाल सोनल को दे दी थी, जिसमें एक हिरण की मृत्यु अधिक खाने से और दूसरे हिरण की मृत्यु गहरे खड्डे में गिरने से हुई थी। अनुसंधान अधिकारी ने इस रिपोर्ट को झुठलाने के लिए डॉ. नेपालिया की रिपोर्ट 10 अक्टूबर तक छिपा कर रखी और बाद में प्राप्त होना बता दिया। बहस के दौरान सैफ अली, नीलम और सोनाली के अधिवक्ताओं की ओर से हजारी माफी का प्रार्थना पत्र पेश किया गया।
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आसाराम छिंदवाड़ा व मणाई आश्रमों का ट्रस्टी नहीं

पिछले चार साल से अधिक समय से जोधपुर की अदालत में चल रहे नाबालिग छात्रा से यौन दुराचार के मामले में आरोपी आसाराम की ओर से अंतिम बहस बुधवार को भी जारी रही। बुधवार को अनुसूचित जाति जनजाति के विशिष्ट न्यायालय के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा के समक्ष आसाराम के अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा ने अभियोजन के उस आरोप का जवाब दिया कि मध्यप्रदेश स्थित छिंदवाड़ा और जोधपुर के मणाई स्थित आश्रमों के मालिक आसाराम हैं, जबकि किसी भी दस्तावेज में आसाराम ट्रस्टी या मालिक नहीं है।


वहीं अधिवक्ता सुराणा ने लड़की की उम्र के सम्बन्ध में फिर बहस करते हुए कहा कि कोर्ट ने स्कूली स्थानांतरण प्रणाम पत्र को विश्वसनीय साक्ष्य नहीं माना है। अभियोजन ने उसी आधार पर आसाराम पर पॉक्सो एक्ट लगा दिया। इसके साथ ही बचाव पक्ष ने अभियोजन के महत्वपूर्ण गवाह विवेक शर्मा और नितिन दवे की ओर से पूर्व में न्यायालय में दिए गए विरोधाभासी बयान पढो और उन पर बहस की। उन्होंने फिर दोहराया कि पूरा मामला संदिग्ध है और आसाराम को बड़ी साजिश के तहत फंसाया है।

नजर किसको ढूंढ रही थी?


दोपहर ढाई बजे पुलिस ने आसाराम को सुरक्षा का मजबूत घेरा बना कोर्ट में पेश किया। एक दर्जन पुलिसकर्मी आसाराम को चारों ओर से घेर कर पुलिस वाहन से सीधे न्यायालय कक्ष में ले गए और तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। इस दौरान भारी संख्या में आसाराम के समर्थक खड़े थे। न्यायालय में जाते और आते समय लग रहा था कि आसाराम की नजरें समर्थकों की भीड़ में अपने किसी खास को ढूंढ रही हों।

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धारा 202 के तहत दुबारा जांच के आदेश नहीं दे सकते : हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज गर्ग ने एक रिविजन याचिका स्वीकार कर एडीजे कोर्ट फलोदी का आदेश अपास्त करते हुए ट्रायल कोर्ट को नया आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता त्रिलोकराम की ओर से अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी ने हाईकोर्ट में पैरवी की। पैरवी करते हुए बताया कि खींचन पंचायत की करोड़ों रुपए की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करवा दी। आरोपियों के खिलाफ इस्तगासे से मुकदमा दायर करवाया गया था, जिसमें पुलिस ने जांच पूरी होने पर ट्रायल कोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया था। आरोपियों की ओर से एडीजे कोर्ट में निगरानी याचिका पेश कर दुबारा जांच करने के आदेश पारित करवाए गए थे, जबकि धारा 202 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत दुबारा जांच के आदेश नहीं दिए जा सकते। हाईकोर्ट ने एडीजे कोर्ट का आदेश अपास्त कर दिया।

Published on:
14 Dec 2017 11:28 am