
Kailash Saraswat/जोधपुर. बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान गुरुवार को अदालत में हुए उपस्थित। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला के पीठासीन अधिकारी देवकुमार खत्री की अदालत में कांकाणी शिकार मामले में चल रही है सुनवाई। बचाव पक्ष की अंतिम बहस के दौरान मुख्य आरोपी सलमान खान अचानक कोर्ट पहुंचे। कोर्ट रूम खचाखच भर गया। इस बारे में कम लोगों को जानकारी होने के कारण कम प्रशंसक ही पहुंच पाए। लेकिन इस खबर की जानकारी मिलते ही न्यायालय परिसर में प्रशंसकों का हुजूम उमड़ पड़ा। सभी प्रशंसक अपने चहेते फिल्मी सितारे को देखने के लिए पहुंचे और इस जुनून के चलते कई प्रशंसक पेड़ों पर जा चढ़े। हालांकि पुलिस की आेर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस कारण बैरीकेड्स भी लगा कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
ब्लैक शर्ट में कूल दिखे सलमान
न्यायालय पहुंचे सलमान खान के साथ उनके बॉलीगार्ड शेरा और एक अन्य व्यक्ति को भी देखा गया। जोधपुर पहुंचे सलमान ने ब्लैक कलर की शर्ट, ग्रे कलर का जैकेट और ब्लू रंग की जींस पहन रखी है और वे कूल अंदाज में परिसर में पहुंचे। यहां खान शांत नजर आए।
अधिवक्ता सारस्वत कर रहे हैं अंतिम बहस
सूत्रों के मुताबिक सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने चश्मदीद गवाह पुनमचंद की वीडियो ग्राफी लैपटॉप पर मजिस्ट्रेट को दिखा कर अंतिम बहस कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस मामले में आज कई सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं।
पिछली सुनवाई में हुई थी यह बहस
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला के पीठासीन अधिकारी देवकुमार खत्री के समक्ष चल रहे बहुचर्चित काले हिरण शिकार मामले में सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने अंतिम बहस करते हुए तर्क दिया कि 11 अक्टूबर 1998 को मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों ने पोस्टमार्टम के दौरान एक काले हिरण की रीढ़ की हड्डी और खाल का टुकड़ाए दूसरे काले हिरण की पांव की हड्डी का टुकड़ाए मांसपेशी का टुकड़ा व खाल का टुकड़ा आदि के नमूने जांच करवाने के लिए अपने कब्जे में लिए थे जिन्हें जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया थाए जिसकी जांच में हड्डी के टुकडे पर गनशॉट की कोई आलामात नहीं पाई गई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने ये नमूने डीएनए जांच के लिए हैदराबाद भेजने का सुझाव दियाएजिन्हें वन विभाग वाले जांच के लिए हैदराबाद ले गए। सारस्वत ने तर्क दिया कि पत्रावली पर ऐसी कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह प्रकट होता है कि मेडिकल बोर्ड के सदस्यों अथवा वन विभाग वालों ने इन नमूनों को सीलचेपा किया हो।
उन्होंने कहा कि नमूने विधिविज्ञान प्रयोगशाला व डीएनए जांच के लिए हैदराबाद भेजने के सम्बन्ध में अभियोजन पक्ष ने गवाह शिवचंद बोहराए कैलाश गिरि व भवानीसिंह को अदालत में परीक्षित करवायाए जिनके बयानों में भारी विरोधाभास है। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है कि नमूने सील हालत में सुरक्षित रूप से भेजे गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि नमूनों के जो जार हैदराबाद भेजे गएए उनमें से तीन जार तो खाली पाए गए और जिस जार में मांसपेशी का टुकड़ा होना बताया गयाए उसमें हड्डी का टुकड़ा मिला। सारस्वत ने आश्चर्य प्रकट किया कि मांसपेशी का टुकड़ा आखिर हड्डी में कैसे तब्दील हो गया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी संदेहास्पद परिस्थितियों से स्पष्ट रोशन होता है कि अनुसंधान अधिकारी ने अनुसंधान के दौरान हर स्तर पर हेराफेरी की हैए इसलिए ऐसे फर्जी अनुसंधान के आधार पर जो झूठ का पुलिंदा रूपी परिवाद पेश किया गया हैए उस पर विश्वास कर के सलमान खान को दोषी नहीं माना जा सकता। समय अभाव के कारण बहस आज पूूरी नहीं हो पाई। अब इस मामले की 2 जनवरी को फिर से सुनवाई होगी।