जोधपुर

300 साल प्राचीन है जोधपुर के चांदपोल स्थित सिद्धेश्वर गणेश, चॉकलेटी दिखती है प्रतिमा

चांदपोल के बाहर विद्याशाला-किला रोड स्थित सिद्धेश्वर गणेश मंदिर तीन सौ से वर्ष से भी प्राचीन है। मंदिर में स्थापित गणपति प्रतिमा की सूंढ दांयी तरफ है जिनके दर्शन शुभ माने जाते हैं। प्रतिमा का रंग चॉकलेटी काला है। प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा में है जिनकी उपासना करने से सर्वकार्य सिद्ध और सर्व विघ्नों का नाश होता है।

less than 1 minute read
siddheshwar ganesh temple at chandpol of jodhpur
300 साल प्राचीन है जोधपुर के चांदपोल स्थित सिद्धेश्वर गणेश, चॉकलेटी दिखती है प्रतिमा

जोधपुर. चांदपोल के बाहर विद्याशाला-किला रोड स्थित सिद्धेश्वर गणेश मंदिर तीन सौ से वर्ष से भी प्राचीन है। मंदिर में स्थापित गणपति प्रतिमा की सूंढ दांयी तरफ है जिनके दर्शन शुभ माने जाते हैं। प्रतिमा का रंग चॉकलेटी काला है। प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा में है जिनकी उपासना करने से सर्वकार्य सिद्ध और सर्व विघ्नों का नाश होता है। जोधपुर में दक्षिणामुखी गणपति प्रतिमा कम ही है।

मंदिर का करीब दो दशक पूर्व जीर्णोद्धार करवाया गया था। मंदिर में प्रत्येक बुधवार को भक्तों की भीड़ रहती है। गणेश चतुर्थी को मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते है। बुजुर्ग परसराम जोशी ने बताया कि सिद्धेश्वर गणेश के हाथों में माला, नागपाश, फरसा और एकदंत और शीश पर सर्प मुकुट है। मंदिर परिसर की तलहटी में गायत्री विद्यापीठ है। इतिहादविदों के अनुसार चांदपोल क्षेत्र में करीब 155 साल पहले विक्रम संवत 1921 में एक सर्वे के समय चांदपोल के बाहर गणपति मंदिरों में सिद्धेश्वर गणेश मंदिर का भी उल्लेख है।

उस समय चांदपोल के बाहर प्राचीन गणपति प्रतिमाओं में चांदपोल दरवाजे के पास, मुथा बुधमल के मंदिर, बोहरा शंकरराज की बगेची, माइदास मंदिर, अजबनाथ मंदिर, गणेश बाग, मीमावतों की बगेची, सेवगों की बगेची, नाइयों की बगेची, शिवबाड़ी, विद्याशाला के चबूतरे पर, विद्याशाला में, रामेश्वर मंदिर, रुघनाथ बावड़ी के ऊपर, माता के कुंड, नागरीदास अखाड़ा में, जागनाथ मंदिर, इकलिंग मंदिर, भूतेश्वर मंदिर सहित कुल 45 छोटे बड़े गणपति बप्पा के मंदिर विद्यमान थे। इन मंदिरों में से कई में आज भी गणपति की मूर्तियां आज भी विद्यमान है जिनका नियमित पूजन होता है।

Published on:
11 Sept 2019 04:37 pm