- जनता को उपयोग की जानकारी ही नहीं - हाईटेक डस्टबिन के बाहर ही पसरा रहता है कचरा
जोधपुर . राज्य ार में कचरा संग्रहण की पहली हाईटेक योजना
को निगम ने तो अमली जामा तो पहना दिया, लेकिन जिस तरह से इस
योजना का पूर्व में गुणगान किया गया, वैसी स्थिति धरातल पर
नजर नहीं आ रही। शहर में इंस्टॉल हुए हाईटेक डस्टबिन के
बाहर ही कचरा बि ारा नजर आ रहा है। बड़ी बात तो यह है कि इन
स्मार्ट डस्टबिन के पास ही निगम के पुराने डस्टबिन कचरे से
आेवर लो रहते हैं। एेसे में राज्य की यह पहली योजना शुरुआती
दौर में ही फेल होती नजर आ रही है। चौंकाने वाली बात तो यह है
कि ठेका फर्म इन डस्टबिन को लेकर सिस्टम ही नहीं बना पाई है
और न ही निगम इन क्षेत्रों की सुध ले रहा है। इधर, जनता ाी
इसके उपयोग से अनजान हैं। एेसे में कचरा संग्रहण को तकनीक
से जोड़कर स्वच्छता को हाईटेक करने की योजना सिरे चढ़ती
नजर नहीं आ रही।
कैसे करें उपयोग
राज्य की पहली हाईटेक योजना के तहत लगाए जाने वाले इन
डस्टबिन का आधा हिस्सा ाूमिगत रहता है, जो कि पक्के निर्माण कर
फिट किया जाता है। निगम का दावा था कि बड़ा चबूतरा बनाकर
इसे फिट किया जाएगा, ताकि जनता को डस्टबिन के बारे में पता
चले। लेकिन एेसा कुछ नजर नहीं आ रहा।
साथ ही इस डस्टबिन के आसपास कोई सांकेतिक बोर्ड नहीं
लगाया है, जिससे जनता को इसके उपयोग का पता चल सके।
हाईटेक डस्टबिन योजना को लेकर निगम की ओर से कोई डेमो
ाी नहीं दिया गया। और न ही इस योजना के विज्ञापन शहर में कही
नजर आ रहे हैं।
इस उद्देश्य से लगाए डस्टबिन
शहर में बल्क कचरा जनरेट करने वाले पॉइंट पर पर परागत
डस्टबिन से हमेशा कचरा बाहर फैला रहता है। कचरा समय पर
ााली ाी नहीं होता। एेसे में ढाई टन की क्षमता वाले स्मार्ट
डस्टबिन लगने से उस क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बनी रहेगी और
शहर ाी स्मार्ट नजर आएगा।
पांच करोड़ की योजना, ७ ला ा का एक डस्टबिन
स्मार्ट डस्टबिन की योजना करीब पांच करोड़ की है। प्रत्येक
डस्टबिन की लागत ७ ला ा रुपए है। ५५ डस्टबिन जोधपुर आ चुके हैं।
इसमें से ३० इंस्टॉल हो चुके हैं। इन डस्टबिन में ढाई टन
कचरा एक साथ ारने की क्षमता है। जीएसएम सिम लगे यह स्टील
कंटेनर के डस्टबिन ारते ही उसमें लगी सिम के माध्यम से
संबधित अधिकारी के मोबाइल पर मैसेज चला जाएगा। मैसेज आते ही
गाड़ी वहां पहुंच कर बिन ााली कर देगी। बेंगलूरु की ठेका
क पनी ही इन डस्टबिन का संचालन करेगी।
गौरतलब है कि पिछले दो माह से यह डस्टबिन शताब्दी सर्कल के
पास सड़क किनारे पड़े थे। ठेका क पनी की लापरवाही के चलते
समय पर इंस्टॉलेशन नहीं हुआ। अब डस्टबिन लगाए गए हैं तो
इसकी सुध नहीं ली जा रही। क पनी प्रत्येक डस्टबिन पर गार्ड
तैनात करने के तो दावे कर रही है, लेकिन वर्तमान स्थिति में
व्यवस्था को ाी सुव्यवस्थित तरीके से सं ााल ले तो ाी यह
योजना सफल हो सकती है।
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इनका कहना है
स्मार्ट डस्टबिन लग चुके हैं। कचरा केरु ड िपंग स्टेशन तक ले
जाने के लिए आने वाली गाड़ी बेंगलूरु से रवाना हो चुकी है।
इसकी कार्यप्रणाली का डेमो दिया जाएगा। किस तरह कचरा
डालें और गाड़ी किस तरह से यह कचरा उठा कर केरु तक ले
जाती है, आदि बताया जाएगा।
-घनश्याम ओझा, महापौर, नगर निगम