
ओसियां। यथार्थ गीता के रचयिता स्वामी अड़गड़ानंद महाराज करीब 75 वर्ष बाद अपनी जन्मभूमि ओसियां पहुंचने के लिए बुधवार को जोधपुर पहुंचे। इसके बाद वे कार से ओसियां के लिए रवाना हुए। जोधपुर एयरपोर्ट से लेकर ओसियां स्थित परमहंस आश्रम तक उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं तथा पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया। उनके पहली बार ओसियां आगमन को लेकर क्षेत्रभर में उत्साह का माहौल रहा। शिष्य राकेशानंद महाराज ने बताया कि स्वामी अड़गड़ानंद महाराज वर्ष 1954 के आसपास ओसियां से निकलकर चित्रकूट स्थित अनुसुइया धाम में अपने गुरु की शरण में गए थे।
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उन्होंने बताया कि इसके बाद वे देशभर के विभिन्न आश्रमों में आते-जाते रहे, लेकिन ओसियां नहीं पहुंचे। अब लगभग 75 वर्ष बाद उनका अपनी जन्मभूमि पर आगमन हुआ है। इस दौरान स्थानीय विधायक भैराराम सियोल, चोहटन विधायक आदुराम मेघवाल, पूर्व केबिनेट मंत्री शंभुसिंह खेतासर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि बुधवार शाम को सत्संग का आयोजन किया गया, जबकि गुरुवार को भंडारा और प्रवचन कार्यक्रम होंगे। श्रद्धालु उनसे मिलकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे तथा अपने जीवन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन ले सकेंगे। वहीं जोधपुर से भी कई श्रद्धालु ओसियां पहुंचे हैं।
राकेशानंद महाराज ने कहा कि उनके स्वागत को लेकर क्षेत्र में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। सभी समाजों, वर्गों और समुदायों के लोग स्वागत एवं सेवा व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में ही ओसियां में आश्रम का निर्माण कर तैयारियां पूरी कर ली गई थीं, लेकिन गुरुदेव हमेशा कहते थे कि जब ईश्वर की आज्ञा और उचित समय होगा, तभी वे यहां आएंगे। अब उनके आगमन से श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी प्रतीक्षा पूरी हो गई है।
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज बुधवार शाम ओसियां पहुंचे। वे आगामी दो दिनों तक ओसियां परमहंस आश्रम में प्रवास करेंगे और कथा-प्रवचन देंगे। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए बड़े डोम सहित विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बड़ी संख्या में भक्तों ने पहले ही ओसियां के होटल और धर्मशालाओं में बुकिंग करवा रखी है। ऐसे में लगभग सभी होटल और धर्मशालाएं फुल हो चुकी हैं।
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के आगमन को लेकर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी एवं समाजसेवी सेवा कार्यों में जुटे हुए हैं। इनमें मर्गेन्द्रसिंह भाटी, भगवानदास राठी, दिलीप सोनी, शैतानसिंह भाटी, मोहनसिंह राजपुरोहित, नंदकिशोर चाडक, विक्रम सेवग, राजेंद्रसिंह शेखावत, राजेंद्र सोनी, जयकिशन सोनी, विनोद दैया, भूराराम गोरछिया, पप्पूराम जाखड़ नेवरा रोड, करणीसिंह उदावत सहित अनेक सेवादार शामिल हैं।