
आनंद पाल एनकाउंटर मामले में उसकी पत्नी राज कंवर गुरुवार को हाइकोर्ट पहुंची। राजकंवर ने कोर्ट में कहा कि फर्जी एनकाउंटर मामले में अभी तक एफआईआर भी दायर नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस पंकज भंडारी के कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका की हुई सुनवाई। अधिवक्ता गोवेर्धन सिंह राठौड़ और रजाक खान ने की पैरवी।
आपको बता दें कि आनंदपाल एनकाउंटर केस में उसकी पत्नी राजकंवर ने हाईकोर्ट में पीटिशन लगाई गई थी। उसने कहा कि परिजनों की तरफ से दी गई आनंदपाल एनकाउंटर के संबंध में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई। साथ ही मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष अनुसंधान नहीं किया जा रहा है। टोल टैक्स पर सीसीटीवी रिकॉर्डिंग ली जानी चाहिए थी, जिसे नहीं लिया गया। इसके अलावा कॉल डिटेल और टॉवर लोकेशन भी नहीं ली गई। राजकंवर ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का पालना भी नहीं की जा रही है। इस मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
यूं हुआ एनकाउंटर
आनंदपाल सिंह को रतनगढ़ के पास मालासर में एसओजी ने घेर लिया। ये अमावस आनंदपाल सिंह पर भारी रही और एके-47 जो हमेशा उसको मौत से बचाती थी वो भी आनन्दपाल को नहीं बचा पाई और पुलिस की गोलियों ने आनंदपाल को ढेर कर दिया।
22 महीने चला सर्च ऑपरेशन
3 सितंबर 2015 को करीब बारह बजे जब आनंदपाल को पेशी पर नागौर ले जाया जा रहा था इस दौरान वह अपने साथियों के साथ फरार हो गया था। जिसके बाद पुलिस मुख्यालय तक में खलबली मच गई। अजमेर रेंज आईजी मालिनी अग्रवाल समेत रेंज के तमाम अफसर उसकी तलाश में जुटे, लेकिन बात नहीं बनी। जांच और तलाश का दायरा बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गया कि एसओजी, एटीएस, ईआरटी, क्यूआरटी समेत सात पुलिस टीमों का गठन किया गया। इन टीमों में प्रदेश भर के काबिल बारह आईपीएस, बीस आरपीएस और कई इंस्पेटर लगाए गए। पूरी टीम में 150 पुलिसकर्मी शामिल किए गए। उसके बाद आनंदपाल की तलाश का काम जो शुरू हुआ वो उसके एनकाउंटर पर जाकर खत्म हुआ। केस से जुड़े पुलिस अफसरों और कर्मियों ने 22 महीने में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब तक की कई बार यात्रा कर ली है।