
रिक्तिया भैरूजी पर बने मल्टीलेवल वीर दुर्गादास राठौड़ ओवरब्रिजमें लचक के बाद यहां दो पिलर लगाने का काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। तमाम प्रयासों के बाद भी यह काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। इसकी सबसे ज्यादा वाहन चालकों को परेशानी हो रही है।
अब भी लोहे के पिलर पर ही टिका
अगस्त में टेस्टिंग के दौरान पिलर में लचक की जानकारी होने पर विशेषज्ञों को बुलाया गया था। लचक के कारण ब्रिज की मजबूती के लिए आईआईआईई बेंगलूरु के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व आरओबी के डिजाइन कन्सल्टेंट आरआर मोहंती व सैनफील्ड इंडिया लिमिटेड मुम्बई के ब्रिज विशेषज्ञ सुनील एस जाधव ने रिपोर्ट तैयार की। उन्होंने यहां कम्पोजिट गर्डर स्पान संख्या 46 व 47 के बीच 45 मीटर की घुमावदार गर्डर के नीचे दो स्थाई पिलर लगाने की बात कही। इसका डिजाइन तैयार किया गया। तब से यहां भारी वाहनों की आवाजाही बंद है। पिलर संख्या 46 व 47 के बीच 550 टन वजनी 45 मीटर की घुमावदार गर्डर के बीच आई लचक के बाद लोहे के सपोर्ट लगाए गए, जो अब भी लगे हुए हैं। पिलर का काम तेज गति से नहीं हो पाया। जेडीए आयुक्त दुर्गेशकुमार बिस्सा सहित अन्य अधिकारी इस मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार नहीं हैं। कार्य की गति के मद्देनजर इसमें समय लग सकता है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी
राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के रिक्तियां भैरूजी मल्टीलेवल आरओबी के मामले में जेडीए के ढुलमुल रवैये पर राज्य की शीर्ष अदालत ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। पूर्व में दी गई तिथि पर आरओबी शुरू नहीं कर पाने पर फटकार लगाई । दोपहर दो बजे तक आरओबी में कथित रूप से आ रहे फाल्ट के बाबत शपथ पत्र पेश करने व इसके लिए जिम्मेदार ठेकेदार व इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए। जस्टिस गोविंद माथुर व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में जेडीए की ओर से एएजी राजेश पंवार ने शपथ पत्र पेश करते हुए कहा कि फाल्ट चैक करने के लिए बैंगलूरू से टीम आ रही है। इस पर खंडपीठ ने टीम द्वारा किए गए टेस्ट की रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।
दुर्गेश बिस्सा ने बताया कि पिछले दिनों आरओबी के सभी स्पान का लोडिंग टैस्ट किया गया था। इसमें लगभग सभी ठीक निकले। लेकिन कुल 48 स्पान में से एक के बारे में संबंधित इंजीनियर ठीक से अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं कि वह सुरक्षित है या असुरक्षित। इस पर खंडपीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि अन्य सभी स्पान की तरह इस स्पान के बारे में भी इंजीनियर को निश्चित राय देनी चाहिए। वह इस तरह की राय कैसे दे सकता है। जब यह बताया गया कि जयपुर से विशेषज्ञों की टीम आ रही है, तो एक बारगी खंडपीठ ने अपराह्न 4 बजे या 6 बजे जब भी रिपोर्ट तैयार हो जाए, कोर्ट में पेश करने को कहा।