जोधपुर

video : मंत्री जारी करते हैं अधिकारियों से लेकर चपरासी तक के स्थानांतरण-पदस्थापन के आदेश

एक नगर परिषद में जूनियर एकाउंटेंट की बार-बार आयुक्त के पद पर नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट में पेश रिकॉर्ड    

2 min read
Feb 11, 2018
 Jodhpur X Rajasthan High Court X jodhpur high court X State Minister X jodhpur latest news X transfer orders X jodhpur latest news in hindi
मंत्री जारी करते हैं अधिकारियों से लेकर चपरासी तक के स्थानांतरण-पदस्थापन के आदेश

एक नगर परिषद में जूनियर एकाउंटेंट की बार-बार आयुक्त के पद पर नियुक्ति के मामले में हाईकोर्ट में पेश रिकॉर्ड से उजागर हुई चौंकाने वाली स्थिति रिकॉर्ड में मिला स्वायत्त शासन व नगरीय विकास मंत्री का लिखित आदेश

- प्रिंसिपल सेक्रेटरी, निदेशक से लेकर प्रशासनिक अधिकारी उस आदेश का अनुसरण करते हैं

- कोर्ट ने रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां तलब करते हुए सरकार से तीन सप्ताह में जवाब तलब किया

जोधपुर . राजस्थान हाईकोर्ट में हनुमानगढ़ नगर परिषद के आयुक्त पद पर बार-बार परिषद के एक जूनियर एकाउंटेंट को चार्ज देने के मामले में पेश हुए रिकॉर्ड से स्थानीय निकाय विभाग में जारी प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। मामले की सुनवाई में सरकार की ओर से पेश रिकॉर्ड में यह तथ्य उजागर हुआ कि इस पद पर चार्ज सौंपने के बारे में स्वायत्त शासन व नगरीय विकास व आवासन विभाग मंत्री श्रीचंद्र कृपलानी की ओर से जारी आदेश मौजूद हैं। इनका संम्बंधित अधिकारियों ने अनुसरण करते हुए जूनियर एकाउंटेंट को बार-बार चार्ज सौंपा था। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस विजय विश्नोई ने सरकार से इस प्रक्रिया की वैधता के बारे में तीन सप्ताह में जवाब तलब कर अप्रार्थी जूनियर एकाउंटेट को आयुक्त का चार्ज देने पर रोक लगा दी है।
जस्टिस विश्नोई ने आदेश में लिखित टिप्पणी की है कि पेश किए गए दस्तावेज अजीब सी परिस्थिति पैदा कर देते हैं। इसमें सम्बंधित मंत्री ने यह निर्देश जारी किया है कि हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश को 5 सितम्बर 2017 को इसलिए परिषद के लेखा अधिकारी राकेश अरोड़ा को आयुक्त नगर परिषद हनुमानगढ़ का कार्यभार दिए जाने के आदेश जारी करें। यह था मामला

याचिकाकर्ता मालचंद शर्मा की ओर से दायर याचिका में अधिवक्ता मनोज भंडारी ने कहा कि नगर परिषद में जूनियर एकाउंटेंट पद पर कार्यरत राकेश अरोड़ा को 14 अक्टूबर 2016 से 4 बार परिषद आयुक्त पद का कार्य सौंपा जा रहा है। याचिकाकर्ता अप्रार्थी अरोड़ा से वरिष्ठ है, तो उसे चार्ज क्यों नहीं सौंपा जाता। यही नहीं, जब भी अरोड़ा को चार्ज सौंपने को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दायर की जाती है, विभाग की ओर से अरोड़ा को चार्ज सौंपने के आदेश वापस ले लिए जाते हैं। इस तरह कोर्ट मामला सारहीन बताते हुए खारिज कर देता है और विभाग फिर से अरोड़ा के नाम से चार्ज सौंपने का आदेश जारी कर देता है। इस बार फिर से याचिका दायर करने पर विभाग को नोटिस जारी करने पर जब अतिरिक्त महाअधिवक्ता की ओर से जवाब पेश किया गया और बाद में सम्बन्धित प्रक्रिया का रिकॉर्ड पेश किया गया, तब कहीं जा कर यह मामला उजागर हुआ।

यह है रिकॉर्ड में

नोटिस का जवाब देते हुए अतिरिक्त महाअधिवक्ता ने करीब 60 पृष्ठ का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया। इसमें बताया गया कि परिषद में आयुक्त से लेकर अधिशासी अभियंता, टैक्स एसेसर, एकाउंटेंट, सहायक फायर ऑफिसर, फायरमैन, एलडीसी, जूनियर इंजीनियर, सहायक इंजीनियर या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक के स्थानांतरण या पदस्थापन के आदेश मंत्री की ओर से जारी किए जाने और उसका अनुसरण विभाग के प्रिंसिपल सैक्रेट्री, निदेशक व प्रशासनिक अधिकारी की ओर से जारी करने की प्रेक्टिस बताया गया।

Published on:
11 Feb 2018 08:03 am