वाराणसी

पापा की सोच बदली और बेटी बन गई वेट लिफ्टर

उम्र महज 15 वर्ष। इस बेटी ने जब अपने पिता से कहा कि मुझे वेटलिफ्टर बनना है, तब एकबारगी उन्होंने कहा कि ये काम लड़के ही कर सकते हैं, लड़कियां नहीं। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अंतत: बेटी के हौसले के आगे पिता की नहीं चली।
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Updated: 21 Aug 2016, 12:11 AM IST
Weight lifter who changed her father
Weight lifter who changed her father

उम्र महज 15 वर्ष। इस बेटी ने जब अपने पिता से कहा कि मुझे वेटलिफ्टर बनना है, तब एकबारगी उन्होंने कहा कि ये काम लड़के ही कर सकते हैं, लड़कियां नहीं। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अंतत: बेटी के हौसले के आगे पिता की नहीं चली।

उन्होंने कह दिया, हां, जा कर दे कुछ कमाल। फिर यह बेटी कमाल दिखाने के लिए जुट गई पसीना बहाने में और बनाई अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान। यह दास्तां है जेनिस जोजफ की। उसने वेट लिफ्टिंग में एक अलग मुकाम हासिल किया। आज 84 प्लस किग्रा वर्ग में जेनिस जिस स्तर पर है, पूरे प्रदेश में अभी तक उसके मुकाबले में कोई नहीं।

पिता ही प्रेरक और कोच

जेनिस ने बताया कि उसके पिता ही उसके कोच व प्रेरक हैं। वे राजकीय सेवा में लिपिक के साथ-साथ वेट लिफ्टर रह चुके हैं और मिस्टर राजस्थान बॉडी बिल्डर खिताब से नवाजे जा चुके हैं। शुरू-शुरू में पिता की सोच नहींं थी कि जेनिस वेट लिफ्टिंग कर पाएगी और नाम रोशन करेगी। इसका कारण यह था कि वह लड़की थी और जेनिस के कोई भाई नहीं था।

जेनिस ने पिता की सोच बदली और 15 साल की उम्र में वेट लिफ्टिंग में भाग लेना शुरू किया। वर्ष 2002 में बीकानेर में पहला स्टेट लेवल वेट लिफ्टिंग चैम्पियनशिप में अच्छा प्रदर्शन किया व स्ट्राँग वीमन ऑफ राजस्थान का खिताब पाया। इससे पिता की सोच बदली और उन्होंने जेनिस पर गंभीरता से ध्यान दिया, उसको सिखाया

आत्मविश्वास बढ़ा और पीछे नहीं मुड़ी

स्ट्राँग वीमन ऑफ राजस्थान के खिताब से नवाजे जाने के बाद जेनिस के आत्म विश्वास में बढ़ोतरी हुई और वह फिर कड़ी मेहनत में जुट गई। इसके बाद जेनिस ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वर्ष 2004 में जमशेदपुर, झारखंड में आयोजित नेशनल चैम्पियनशिप में पहली बार उतरी जेनिस ने सिल्वर मेडल जीता। इसी वर्ष दक्षिण अफ्रीका में आयोजित वल्र्ड चैम्पियनशिप में भाग लेकर चौथा स्थान हासिल किया। उस समय उसकी उम्र 18 वर्ष थी।

एशियन चैम्पियनशिप व कॉमनवेल्थ में गोल्ड

वल्र्ड चैम्पियनशिप में बिना मेडल लौटने पर उसे दुख हुआ और उसने दृढ़ संकल्प लिया कि आगे वह कभी खाली हाथ नहीं लौटेगी। इसके बाद वर्ष 2005 में भारत में आयोजित एशियन पैसिफिक चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल लाई।

वर्ष 2006 में दक्षिण कोरिया में एशियन चैम्पियनशिप में बेहतर प्रदर्शन करते हुए 4 गोल्ड मेडल हासिल किए। वर्ष 2007 में न्यूजीलैण्ड में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 4 गोल्ड मेडल लिए। इससे पूर्व 2007 में ओपन वल्र्ड चैम्पियनशिप में 9वी रैंक हासिल की।

खेल ने दिलाई नौकरी

श्रेष्ठ खेल प्रदर्शन के आधार पर वर्ष 2008 में रेलवे में नौकरी मिली और चाही गई जगह (जोधपुर) पर पोस्टिंग मिली। जेनिस आज रेलवे में हेड टीटीआई पद पर कार्यरत है। वर्ष 2009 में शादी के महज एक माह बाद ही पुणे में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लिया और 4 सिल्वर मेडल जीते।

अब, जेनिस नौकरी के अलावा अपना पूरा समय आगामी टूर्नामेंट्स के लिए प्रैक्टिस में लगा रही है।

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