CGPSC Pre Exam Result 2026: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘मावा मोदोल’ (मेरा मूल मेरा भविष्य) एक बार फिर अपनी प्रभावशीलता साबित करते हुए चर्चा में है।
CGPSC Pre Exam Result 2026: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘मावा मोदोल’ (मेरा मूल मेरा भविष्य) एक बार फिर अपनी प्रभावशीलता साबित करते हुए चर्चा में है। इस निःशुल्क कोचिंग से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने CGPSC प्री परीक्षा 2025 में शानदार प्रदर्शन किया है, जहां 20 छात्र-छात्राओं ने सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि न केवल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई है।
इस पहल को कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण कोचिंग उपलब्ध कराना है। इस प्रयास ने उन युवाओं को नई दिशा दी है, जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों से दूर हो जाते थे।
‘मावा मोदोल’ कोचिंग का संचालन जिला मुख्यालय कांकेर और विकासखंड मुख्यालय भानुप्रतापपुर में किया जा रहा है। पिछले एक वर्ष से यहां विद्यार्थी नियमित अध्ययन कर रहे थे, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।
इस सफलता में भानुप्रतापपुर शाखा के 12 और कांकेर शाखा के 8 विद्यार्थियों ने CGPSC प्री परीक्षा में सफलता हासिल की है। सभी सफल छात्रों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर मेहनत की।
इन विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि आर्थिक रूप से कमजोर रही, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं होती। कोचिंग द्वारा उपलब्ध कराए गए मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री और सकारात्मक वातावरण ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।
कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और प्रशासन की प्रतिबद्धता का संयुक्त परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए ऐसे प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
जिला पंचायत के CEO हरेश मण्डावी ने भी छात्रों की उपलब्धि पर खुशी जताई और कहा कि अब मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है। विषय विशेषज्ञों की मदद से अतिरिक्त प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक छात्र अंतिम चयन में सफल हो सकें।
‘मावा मोदोल’ पहल अब अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बनकर उभर रही है। यह पहल दिखाती है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सही दिशा मिले, तो ग्रामीण और कमजोर वर्ग के छात्र भी बड़े स्तर की परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं।