मदर्स डे - इन दादी माँ के जज्बों को सलाम - जब मां बाप का उठा सिर से साया तो दादी ने माँ बनकर की परवरिश
कन्नौज. कलयुग में भले ही सारे रिश्ते दम तोड़ रहे हों लेकिन ममता का रिश्ता भी बच्चों के जीवन में सतरंगी रंग भर रही है। हम कुछ ऐसी मांअों की बात कर रहे हैं जिनका किरदार तो दादी मां का था लेकिन परिस्थितियों ने उनको मां का किरदार निभाने के लिए जिन्दा रखा। कुछ बच्चे ऐसे जिनपर कुदरत की मार से बचपन में उनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया। अनाथ बच्चों की दुनिया में अंधेरा छा गया। वह कुछ समझने लायक होते, इससे पहले उनकी दादी अम्मा ने मां का किरदार अदा कर सहारा दे दिया।
वह बच्चों को पढ़ाने संग स्वावलंबन की प्रेरणा भर रही हैं। साथ में उनको दुनिया की सीख देने की हर कोशिश करती हैं। यह शख्सियत चाहे छिबरामऊ के मोहल्ला भैनपुरा की रहने वाली सत्तर वर्षीय लक्ष्मी देवी हो या सदर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली 78 वर्षीय राजेश्वरी देवी या फिर 65 वर्षीय यशोधरा या थाना ठठिया क्षेत्र के सुरसा गांव की रहने वाली 77 वर्षीय यशबंती हो।
70 वर्ष की उम्र खुद काम करके मां का दिया प्यार
बात करीब पांच साल पुरानी है। उनके बेटे संजीव गुप्ता व बहू कल्पना गुप्ता काम के सिलसिले में जयपुर चले गए थे। वहां बी-वन, सुंदर विहार में रहने के साथ निजी कंपनी में नौकरी कर परिवार की गुजर-बसर करने लगे। इस दौरान 21 जून 2017 को किसी कारण से दंपती ने फांसी लगाकर खुदकशी कर ली। उनके साथ दोनों बच्चे तेरह वर्षीय आशीष गुप्ता व बराह वर्षीय बुलबुल गुप्ता भी थे। माता-पिता की मौत के बाद वह बदहवास हो गए। मानसिक रूप से तनाव में आ गए। इस पर दादी अम्मा ने मां फिर मां बन अपने बेटे के तौर पर पौत्र व पौत्री की परवरिश शुरू की। 70 वर्ष की उम्र होने के बाद भी दोनों बच्चों की परवरिश के लिए खुद काम तक शुरू किया। दादी अम्मा के तौर पर उनको मां व पिता का पूरा प्यार मिलने लगा।
जब एक दिन के बच्चे को दिया मां का प्यार
इसी तरह सदर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली 65 वर्षीय यशोधरा की बात करें तो आज 65 वर्ष उम्र में वह अपने एक पौत्र और एक पौत्री को पाल रही है। बच्चों के सिर से मां बाप का साया दो साल पहले उठ गया था। तब से कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के वावजूद भी परवरिश का जिम्मा अपने ऊपर लेकर एक मां का किरदार पूरी तरह से निभा रही हैं। इसी क्रम में सदर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली 78 वर्षीय राजेश्वरी देवी ने बिना मां के एक दिन के बच्चे को दादी मां की जगह मां का किरदार निभाते हुए उस बच्चे को 16 साल का कर दिया।
8 माह के बच्चे को 77 साल की उम्र में दे रही हैं मां का प्यार
थाना ठठिया क्षेत्र के सुरसा गांव की रहने वाली 78 वर्षीय यशबंती की बात करें तो 2 मई 2018 को उसके सामने ही उसके बेटे ने बहू को केरोसीन डाल कर जला दिया। जिससे बहु की मौके पर ही मौत हो गई और बेटे को जेल। उस बहू और बेटे की चार साल की पुत्री और 8 माह के बच्चे की जिम्मेदारी 77 साल की उम्र में एक मां बनकर अपना दायित्व निभा रही हैं। यशबंती की माने तो अब हमारे आलावा कौन इनको मां का प्यार दे सकता है ।