पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जब अपनी बुआ के घर गहलौं गांव आये थे, तो गांव के लोगों ने स्कूल की मांग की थी। वे गांव के लोगों के साथ बैठकर बातें किया करते थे, आज सन्नाटा पसरा हुआ है।
कानपुर देहात-तीन बार देश का नेतृत्व करने वाले व्यक्तित्व के धनी रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर जहां पूरा देश गमगीन है। वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के एक गांव में मातम सा छाया हुआ है। इसकी मुख्य वजह है उनकी बुआ का घर। पूरा गांव उन्हें लालू बुआ कहकर पुकारते थे। जब भी वे कानपुर या कानपुर देहात आया करते थे तो वे अपनी बुआ से मिलने जरूर जाया करते थे और गांव के लोगों से बातें किया करते थे। दरअसल बाजपेयी की बुआ विंध्यवासिनी का घर जिले के गहलौं गांव में है, जो आज सूना पड़ा है। क्योंकि बुआ के कोई संतान नही थी। तो तनाव को खत्म करने के लिए बुआ फूूफा ने चौबेपुर निवासी अपने भांजे मनमोहन शुक्ला को गोद ले लिया था।
गांव के लोगों से लेते थे हालचाल
गांव के रवींद्र अवस्थी बताते हैं कि धीरे धीरे समय गुजरता गया। लालू बुआ का निधन हो गया और कुछ समय बाद फूफा का भी इंतकाल हो गया। इसके बाद मनमोहन परिवार के साथ दिल्ली चले गए तो गहलौं में बुआ का वह घर वीरान हो गया लेकिन गांव के वो बुजुर्ग जिनके साथ बैठकर उन्होंने कुछ समय गुजारा था, आज उनकी आंखे करुण क्रंदन से नम हो चली है। नीम का वह पेड़ जहां उन्होंने बैठकर गांव के रवीन्द्र अवस्थी के साथ गांव के हालचाल लिए थे और गांव के लोगों ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थितियों का व्याख्यान कर एक स्कूल की मांग कर दी थी। धीरे से मुस्कराते हुए उन्होंने आश्वासन दिया और कुछ समय रुकने के बाद वे बुआ के घर आकर बैठ गए।
बोले थे बुआ के आंचल में मिलता है सुकून
बिजली के अभाव में गांव के लोग हाँथ में लिए पंखा से उनके ऊपर हवा कर रहे थे। जिस पर उन्होंने कहा मुझे पंखा की हवा न करो, मुझे इस गांव की प्राकृतिक गर्मी का एहसास तो होने दो। उनकी ये बात सुनकर सभी लोग हंस पड़े। बुआ ने घर मे रखी मिठाई से उनको पानी पिलाया तो उन्होंने कहा बस यही सब उस एसी की ठंडक में नहीं मिलता है, जो सुकून बुआ के आँचल में बैठकर मिलता है। गांव के लोगों से मिलने के बाद वे वापस दिल्ली लौट गए। लोगों को लगा कि शायद स्कूल की बात उन्हें याद नही रहेगा।
गांव में जगह न होने पर स्कूल अधर में लटक गया
जब भांजे मनमोहन शुक्ला दिल्ली उनसे मिलने गए तो उन्होंने कहा सब याद है और फिर उन्होंने गहलौं के लिए एक राजकीय स्कूल स्वीकृत किया। दुर्भाग्यवश गांव में जगह न होने पर स्कूल अधर में लटक गया। कानपुर में रह रहे मनमोहन के नाती सौरभ शुक्ला आज गांव की उस धरोहर को संजोय रखते हैं। जब अटल बिहारी बाजपेयी के निधन की खबर लोगों ने टीवी पर देखी तो गांव के लोगों पर पहाड़ सा टूट पड़ा और गांव में सिसकियां गूंजने लगी।