कानपुर

कोरोनाः मरीजों को लूट रहे कोविड अस्पताल, एंबुलेंस चालक ने भी की अवैध वसूली, डीएम ने लिया एक्शन

covid hospital excessive charges corona patients in kanpur. प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों में बेड व अन्य व्यवस्थाओं की कमी को देखते हुए 16 निजि अस्पतालों को कोविड स्टेटस दिया था।
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Updated: 27 Apr 2021, 6:58 PM IST
Covid Patients
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पत्रिका न्यूज नेटवर्क.
कानपुर. covid hospital excessive charges corona patients in kanpur. उत्तर प्रदेश में कोरोना (coronavirus in up) मरीज काल के गाल में समा रहे हैं, लेकिन अस्पताल इस घड़ी में भी मुनाफाखोरी करने के अवसर ढूढ़ रहे हैं। कानपुर के कोविड दर्जा प्राप्त कर चुके कुछ निजी अस्पतालों का हाल यही है। यहां मरीजों से जरूरत से ज्यादा शुल्क लिया जा रहा है। वहीं एंबुलेंस चालक भी मन मुताबिक रुपया मांग रहा है। हालांकि इसकी भनक जब प्रशासन को लगी, तो ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, तो जरूरत से ज्यादा बिल बनाने वाले अस्पताल को भी नोटिस जारी हुआ है। जवाब आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। कानपुर में बीते कुछ दिनों से कोविट मामले तेजी से बढ़े हैं। लखनऊ में बाद यहां सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं। सोमवार को मृतकों की संख्या (28) पूरे प्रदेश में सर्वाधिक थी। प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों में बेड व अन्य व्यवस्थाओं की कमी को देखते हुए 16 निजि अस्पतालों को कोविड स्टेटस दिया था।

डीएम ने जारी किया नोटिस-

मामला कानपुर के कोविड स्टेटस प्राप्त फैमिली हॉस्पिटल का है। हर निजी अस्पताल की तरह इस अस्पताल के लिए कोविड मरीजों के इलाज के लिए शुल्क निर्धारित है, बावजूद इसके अस्पताल मुनाफा कमाने में लगे हैं। फैमिली अस्पताल द्वारा ओवर बिलिंग करने की शिकायत जिला प्रशासन को प्राप्त हुई। इस पर सक्रियता दिखाते हुए एसीएम और एसीएमओ ने जांच की, जिसमें यह बात सच साबित हुई। जिलाधिकारी आलोक तिवारी ने इस पर अस्पताल को नोटिस जारी कर दिया और जवाब मांग। जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एंबुलेंस चालक ने वसूले तीन हजार रुपए-
एंबुलेंस चालक भी इन दिनों मुनाफा कमाने का मौका नहीं छोड़ रहे। यहां संक्रमित का का शव ले जाने के लिए एंबुलेंस ड्राइवर ने 3 हजार की अवैध वसूली की। इस पर चालक के खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज हो गया। कोविड अस्पतालों की निगरानी के लिए कानपुर जिलाधिकारी ने स्टेटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए हैं। प्रशासन की सख्त आदेश है कि मरीजों को अस्पतालों में बेहतर इलाज मिले व उनसे ओवर चार्ज न लिया जाए।

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