
कानपुर। पिछले माह लाला लाजपत राय (हैलट) अस्पताल में आक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाने से आईसीयू में एडमिट पांच मरीजों की मौत हो गई थी, बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। एक बार फिर आक्सीजन प्लांट पर आग लग गई, जिससे हड़कंप मच गया। डॉक्टर्स और अन्य कर्मचारियों ने आईसीयू में भर्ती मरीजों को किसी तरह से बाहर निकाल दमकल को सूचना दी। जानकारी पर दमकल की टीम व अन्य लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन प्लांट पर आग लगने से अस्पताल में आक्सीजन की सप्लाई बंद हो गयी। जिससे मरीज तड़प उठे। किसी तरह से उन्हें अन्य वार्डो में शिफ्ट कर डॉक्टर्स ने इलाज शुरू किया।
तड़पते रहे मरीज
हैलट अस्पताल में देर रात करीब एक बजे आईसीयू के पास बने आक्सीजन प्लांट में आग लग गई, जिसके कारण मरीजों के साथ डॉक्टर्स व तीमारदारों ने भाग कर जान बचाई। अस्पताल प्रबंधन ने फायर बिग्रेड का सूचना दी। अस्पताल प्रशासन व दमकल ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब ने ढाई बजे आग पर काबू पाया जा सका। आग शार्ट सर्किट से लगी है। वहीं मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि आग लगने से डॉक्टर्स मरीजों को छोड़कर भाग खड़े हुए। हमलोगों ने किसी तरह से उन्हें बाहर निकाला। तीमारदारों का आरोप है कि ऑक्सीजन की सप्लाई रोके जाने से मरीज कई घंटे तक तड़पते रहे। अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था कर ऑकसीजन शुरू कराई।
आज भी जूझते रहे मरीज
आक्सीजन प्लांट पर आग लगने से सोमवार को अस्पताल में भर्ती मरीजों को आक्सीजन देने के लिये अस्पताल प्रबंधन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में आक्सीजन की सप्लाई ठप होने से मरीजों व तीमारदारों में हड़कंप मचा हुआ है। हैलट अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर आरसी गुप्ता ने बताया कि आक्सीजन के लिये फिलहाल वैकल्पित व्यवस्था बनाई जा रही है किसी भी मरीज को आक्सीजन की कमी नहीं होने दी जायेगी। कहा कि अस्पताल में आग लगने से आक्सीजन की सीधी सप्लाई पूरी तरह से बंद हो गयी है।
प्रिंसिपल लिख चुके हैं शासन को पत्र
करीब एक माह से पहले अस्पताल के प्रधानाचार्य डॉक्टर नवनीत कुमार ने शासन को पत्र लिखा था कि अस्पताल में आक्सीजन गैस की सही से आपूर्ति नहीं की जा सकती। क्योंकि यहां की आक्सीजन सप्लाई की सभी लाइनें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। ऐसे में नये सिरे से पूरे अस्पताल में उच्च स्तरीय आक्सीजन की लाइनें डाली जायें और कंडम मशीनों से हो रही आक्सीजन की सप्लाई को नई मशीनों से किया जाये। लेकिन शासन की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आ सका। इसी के चलते दोबारा आक्सीजन प्लांट में आग लग गई।