कानपुर

होलिका दहन से शोक में डूब जाते हैं गांव के लोग, नहीं मनाई जाती होली, ये है कारण

कानपुर देहात का एक ऐसा गांव रामनगर जहां होली का त्योहार नहीं मनाया जाता...
2 min read
• •
Updated: 1 Mar 2018, 11:08 AM IST
Holi not celebrated in Ram Nagar Kanpur Dehat UP news
यहां होलिका दहन से शोक में डूब जाते हैं लोग, नहीं मनाई जाती होली, ये है कारण

कानपुर देहात. जहां होली जैसे पर्व को मनाने के लिए सभी घरों में महिलाएं मिष्ठान, गुझिया व पकवान बनाने में जुटी है। बच्चे लकड़ी एकत्रित कर गोबर के बल्ले पाथकर होलिका दहन की तैयारी कर रहे हैं। वहीं एक ऐसा गांव भी है जहां गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अपनी दैनिक दिनचर्या में मशगूल हैं। एक दिन बाद समूचे देश मे रंग बिरंगे पर्व होली के रंग में सराबोर होकर सभी मस्ती में झूम रहे होंगे। बच्चे पिचकारियों से रंग गुलाल एक दूसरे पर उड़ेल रहे होंगे। वहीं इस होली के बवंडर से हटकर जिला कानपुर देहात का एक ऐसा गांव रामनगर भी है, जहां लोग होलिका दहन के शोक में डूब जाते हैं। गांव में न तो होली जलाई जाती है और न ही होली खेलने व पकवान बनाने की परम्परा है। गांव की आबादी करीब 350 है, गांव में निवास करने वाला ऐसा समुदाय है, जिनका मानना है कि होलिका के साथ अन्याय अत्याचार किया गया था। जिसके चलते पूरे गांव में होली नहीं मनाई जाती है।

इसलिए नहीं मनाते होली ये है कारण

जी हां जनपद कानपुर देहात के झींझक ब्लाक क्षेत्र के गांव रामनगर की हम बात कर रहे हैं। आपको बता दें इस गांव में कई वर्षों से न तो घरों में रंग खेले जाते हैं और न ही त्योहारों पर पकवान बनते है। सुनने में थोड़ा सा अजीब लगा होगा। लेकिन देखने वाली बात यह है कि जहां एक और घरों में त्योहार आते ही कहीं चिप्स पापड़ तो कहीं गुलाल उड़ाए जाते हैं। वहींं कानपुर देहात के इस गांव की होली तो बेरंग ही नजर आती है। जब घरों में जाकर देखा तो घरों पर ही नहीं छत पर भी सन्नाटा पसरा था। एक और जहां पूरे भारत में रंग अबीर गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी जा रही होती है तो वहीं दूसरी तरफ झींझक के गांव रामनगर में सन्नाटा दिखाई पड़ता है। ग्रामीणों की मानें तो उनकी एक परंपरा के अनुसार होलिका वंशज होने के चलते ग्रामीण होली नहीं मनाते हैं। उनका कहना है कि होलिका के साथ अन्याय हुआ और होलिका जल गई। इन प्रथा को हम नहीं मानते हैं, इसलिए हम लोग होली पर्व नहीं मनाते हैं।

गांव की गलियों में ऐसे पसरा सन्नाटा

गांव के बुजुर्गों के हिसाब से होलिका दहन का जो उद्देश्य है, वह गलत है जिसके कारण ग्रामीण न होली जलाते हैं और न ही खेलते हैं। आम दिन की तरह पूरा त्यौहार गुजारा जाता है। जहां एक ओर भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में हर्ष उल्लास के साथ इस त्यौहार को मनाया जा रहा है, वही इस गांव में लोग अपनी दैनिक दिनचर्या के कार्य निपटाते है। जब गांव में देखा गया तो गलियों सहित छतों पर सन्नाटा फैला था।

नहीं बनते पकवान

त्योहार आते ही मन में हर्ष और उल्लास रखने वाली महिलाओं से जब बातचीत की तो पता चला कि इस गांव में किसी भी घर में त्यौहार के समय पकवान ही नहीं बनाए जाते है। रोजाना की तरह सामान्य खाना खाया जाता है। महिलाओ का कहना है कि होली को लेकर कोई उत्सुकता नहीं रहती है।

Published on: