आईआईटी - कानपुर में सात दिवसीय कार्यशाला में 16 संस्थानों के 61 आर्किटेक्ट इंजीनियरों का हुनर निखारेंगे विशेषज्ञ
कानपुर . अपने घरौंदे का सपना देखने वालों के लिए अच्छी खबर है। काबिल आर्किटेक्ट इंजीनियर से मकान का नक्शा बनवाएंगे तो जबरदस्त भूकंप में इमारत डोलती रहेगी, लेकिन जमींदोज नहीं होगी। आईआईटी में आकिटेक्ट इंजीनियरों की काबिलियत को निखारने और भूकंपरोधी इमारतों की नई डिजाइन को समझाने-सिखाने के लिए सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इस कार्यशाला में भूकंप के तेज झटकों को बर्दाश्त करने के लिए बिल्डिंग की नई डिजाइनों पर काम किया जाएगा। साथ ही विशेषज्ञ बताएंगे कि किस तरह की इमारतों में कैसे भूकंपरोधी उपाय अपनाने चाहिए।
16 संस्थानों के 61 इंजीनियरों का कुनबा
आईआईटी- कानपुर के नेशनल इंफार्मेशन सेंटर ऑफ अर्थक्वेक इंजीनियरिंग की कार्यशाला में देश के 16 नामचीन संस्थानों से भूकंपरोधी डिजाइन पाठ्यक्रम के 61 छात्रों को बुलाया गया है। कार्यशाला में भविष्य के आकिटेक्ट इंजीनियरों के जरिए ऐसी इमारतों की डिजाइन को तैयार किया जाएगा, जोकि 8 रिक्टर की तीव्रता वाले भूकंप में भी सुरक्षित रहेंगी। दरअसल, मकान को मजबूती देने के लिए सिर्फ कॉलम-बीम ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि यह जरूरी होता है कि किस स्थान पर किस कोण से कॉलम-बीम को सेट करना है। इसके अतिरिक्त कुछ स्थानों पर मोटी और कुछ स्थानों पर लचीलेपन के लिए पतली सरिया डालनी होती है। उदघाटन सत्र में आईआईटी- कानपुर के प्रोफेसर चिन्मय कोले ने कहाकि आर्किटेक्चर की जड़ें इंजीनियरिंग में हैं, जबकि इंजीनियरिंग विज्ञान का हिस्सा है। ऐसे में आकिटेक्ट इंजीनियरों की जिम्मेदारी इस नाते भी ज्यादा है कि आर्किटेक्ट का जुड़ाव प्रत्येक सामान्य व्यक्ति से है, इसलिए इस विधा के छात्रों को ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए।
सिर्फ कॉलम-बीम नहीं, एंगल और मोटाई भी जरूरी
कार्यशाला के दूसरे दिन बताया गया कि सामान्य रूप से आर्किटेक्ट इंजीनियर अच्छे मकान को डिजाइन करते हैं, लेकिन भूकंपरोधी उपायों को नजरअंदाज कर देते हैं। कार्यशाला में आर्किटेक्ट इंजीनियरों को बताया जाएगा कि अमुक ऊंचाई की इमारत में कहां-कहां कॉलम और बीम को किस एंगल से ढालना चाहिए। आयोजकों में शामिल सेवानिवृत्त कमोडोर सुरेश एलावादी बताते हैं कि मकान का नक्शा बनवाते समय आर्किटेक्ट इंजीनियर से एक सवाल जरूर पूछिएगा। सवाल है- बिल्डिंग में भूकंपरोधी क्या उपाय किये हैं।
आठ रिक्टर स्केल भूकंप का मतलब - तबाही
भू-विज्ञान के मुताबिक, भूकंप को तीव्रता के आधार पर छह श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। रिक्टर पैमाने पर 2.5 तीव्रता के भूकंप को महसूस करना भी मुश्किल होता है, प्रत्येक वर्ष दुुनिया में नौ लाख से ज्यादा भूकंप इसी श्रेणी के आते हैं, जबकि 2.5 से 5.4 तीव्रता वाले भूकंप महसूस होते हैं, लेकिन नुकसान हल्का होता है। प्रत्येक वर्ष ऐसे तीस हजार भूकंप आते हैं, जबकि 5.5 से 6.0 रिक्टर पैमाने वाले भूकंप से पुरानी इमारतों के गिरने का खतरा रहता है। इसी प्रकार 6.1 से 6.9 रिक्टर भूकंप के कारण बड़े पैमाने पर जन-धनहानि होती है। 7.0 से 7.9 तीव्रता वाले भूकंप से बड़ी-बड़ी इमारतें जमींदोज हो जाती हैं। इसी प्रकार के भूकंप में तमाम शहर तबाह हो चुके हैं। आईआईटी की कार्यशाला में ऐसी इमारतों की डिजाइन तैयार होगी, जोकि 8 रिक्टर पैमाने तक के भूकंप से इमारतों को सुरक्षित रखेंगी। आठ रिक्टर स्केल से ऊपर के भूकंप में तबाही को रोकना फिलहाल नामुमकिन है।
विशेषज्ञ निखारेंगे हुनर, फिर काबिलियत को मिलेगा इनाम
कार्यशाला का समापन 23 जून को होगा। इस दरम्यान हावड़ा के नामचीन संस्थान आईआईईएसटी के प्रोफेसर केया मित्रा, पुणे के बीएन कालेज ऑफ आर्टिटेक्चर की वसुधा गोखले और मीरा शिरोलकर, जोरहट इंजीनियरिंग कालेज के अतानु दत्ता, आईआईटी-भुवनेश्वर के सुरेश दत्ता और सैन्चुरियनल यूनीवर्सिटी - भुवनेश्वर की स्निग्धा सान्याल कार्यशाला में शामिल 61 आकिटेक्ट इंजीनियरों का हुनर निखारेंगी। इसी दौरान छात्रों को भूकंपरोधी इमारत की बेजोड़ डिजाइन बनाने का टॉस्क भी दिया जाएगा। सबसे शानदार डिजाइन को 15 जुलाई को पुरस्कृत भी किया जाएगा।