IIT Special News आईआईटी ने एक और उपलब्धि हासिल की है। आईआईटी में रामानुजन फेलो के रूप में कार्यरत डा. राजेश कुमार को विश्व के शीर्ष विज्ञानिकों में सम्मिलित किया गया है। उन्होंने केंद्रीय विवि प्रयागराज से बीएससी व भौतिकी से एमएससी की डिग्री लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. आइआइटी कानपुर (IIT Kanpur) ने देश को नई बड़ी उपलब्धियां दीं तो वहीं यहां के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने कई शोधों में महारथ हासिल कर देश को गौरवान्वित किया है। वहीं अब आईआईटी ने एक और उपलब्धि (IIT Achievement) हासिल की है। आईआईटी में रामानुजन फेलो के रूप में कार्यरत डा. राजेश कुमार (Dr, Rajesh Kumar) को विश्व के शीर्ष विज्ञानिकों में सम्मिलित किया गया है। दरअसल डॉ. राजेश कुमार का नाम संयुक्त राज्य अमेरिका की स्टैनफोर्ड विवि की ओर से तैयार किए गए विश्व के दो प्रतिशत शीर्ष वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है।
शिक्षा के बाद कई देशों में किए शोध कार्य
डा. राजेश कुमार मऊ जिले के ग्राम बनियापार के रहने वाले हैं। उन्होंने केंद्रीय विवि प्रयागराज से बीएससी व भौतिकी से एमएससी की डिग्री लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। इसके बाद उन्होंने दक्षिण कोरिया स्थित योनसेई विवि के कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलाजी, यूनिवर्सिटी आफ कैंपिनास, ब्राजील की स्टेट यूनिवर्सिटी आफ साओपाउलो और जापान की तोयोहाशी यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी में शोधकार्य किए। इसके पहले डा. राजेश को ब्रेन कोरिया-21, दक्षिणी कोरिया, साओपाउलो रिसर्च फाउंडेशन फेलोशिप, ब्राजील और जापान सोसाइटी फार प्रमोशन आफ साइंस की ओर से उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप मिल चुकी है।
कार्बन नैनो मैटीरियल्स का किया निर्माण
डा. राजेश ने बताया कि उन्होंने एक दशक से भी ज्यादा समय तक कार्बन नैनो मैटीरियल्स का निर्माण और ऊर्जा के क्षेत्र में वैज्ञानिकों के साथ काम किया है। अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 76 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि नैनो मैटीरियल्स का उपयोग बैट्री और सुपर कैपेसिटर में इलेक्ट्रोड के रूप में प्रयोग होता है। इसके प्रयोग से ऊर्जा संचयन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही नैनो मैटीरियल्स से बनी ऊर्जा संचयन युक्ति को वाहनों में लगाकर पर्यावरण प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।