कानपुर

IIT Kanpur की इस वेबसाइट पर मिलेगा भगवतगीता और रामायण का डिजिटल रूप

IIT Kanpur की इस वेबसाइट पर मिलेगा भगवतगीता और रामायण का डिजिटल रूप

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कानपुर। आईआईटी कानपुर में हिंदू पवित्र ग्रंथों के डिजिटलाइजेशन की अनोखी प्रक्रिया चल रही है। हालांकि इस शुरू काफी पहले किया गया था लेकिन पिछले कुछ दिनों से ये ज्यादा चर्चा में है। इसके तहत संस्थान धर्म ग्रंथों को अडियों और डिजिटल टेक्टस फार्म में तब्दील हो रहा है।आईआईटी की वेबसाइट https://www.gitasupersite.iitk.ac.in/ पर जाकर आप इसे देख सकते हैं।

इसके तहत श्रीमद्भगवतगीता, रामचरितमानस, ब्रह्मसूत्र, योगसूत्र, श्री राम मंगल दासजी, नारद भक्ति सूत्र को अपलोड किया गया है। इसके साथ ही वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड और बालककांड समेत नौ ग्रंथों का संस्कृत अनुवाद कर यहां अपलोड किया गया है।अवधी में लिखे रामचरितमानस के अनुवाद की जिम्मेदारी आईआईटी गुवाहाटी के फैकल्टी मेंबर देव आनंद पाठक को सौंपी गई है। आईआईटी ने केंद्र से और फंड की मांग की है जिससे अन्य ग्रंथों का डिजिटलाइजेशन किया जा सके।

24,000 प्रति दिन पेज व्यूज

दरअसल पिछले कुछ दिनों से इस वेबसाइट https://www.gitasupersite.iitk.ac.in/ का पेज व्यूज औसतन पांच सौ प्रति दिन से पढ़कर 24 हजार प्रतिदिन हो गया है। ये बात सामने आने से सभी फैकल्टी हैरान हैं। इस साइट को इंस्टिट्यूट की फैकल्टी व सरकार द्वारा सहायता प्राप्त रिसोर्स सेंटर फॉर इंडियन लैंग्वेज टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन ने तैयार किया है। इसमें संस्कृत में लिखी जानकारियों को 11 भाषाओं में ट्रांसलेट किया गया है जिसमें असम की व उड़िया भाषा भी शामिल हैं। साइट से जुड़े प्रोफेसर्स का कहना है कि पहले इस वेबसाइट का ट्रैफिक रोजाना 500 हिट प्रतिदिन का रहता था लेकिन पिछले कुछ दिनों से 24,000 प्रति दिन पेज व्यू आ रहा है। इसके अलावा वॉट्सऐप ग्रुप पर भी इस वेबसाइट के यूआरएल को काफी सर्कुलेट किया जा रहा है।

प्रोफेसर भी हैरान

वॉट्सऐप ग्रुप पर जो मैसेज वायरल हो रहा है उसमें लिखा है कि आईआईटी कानपुर द्वारा ऐसी वेबसाइट बनाई गई है जिसमें वेद व शास्त्रों की तमाम जानकारियां व अनोखे फैक्ट्स हैं। जबकि ये वेबसाइट तो दस साल पहले ही संस्थान द्वारा तैयार की गई थी।कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर टीवी प्रभाकर ने इस वेबसाइट का डाटाबेस डिजाइन किया है। उनका कहना है कि दस साल पहले जब इस वेबसाइट को तैयार किया गया था तो इसका उद्देश्य भारत के पौराणिक ज्ञान को कंप्यूटर के जरिए लोगों तक पहुंचाने का था। उस वक्त इस वेबसाइट की इतनी चर्चा नहीं हुई थी जितनी आजकल हो रही है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया व वॉट्सऐप के माध्यम से इस वेबसाइट का यूआरएल वायरल हो रहा है।

कोई विवाद नहीं

हाल ही में इस लिंक पर वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में लिखी रामायण के सुंदरकांड और बालककांड का अनुवाद भी जोड़ा गया है।आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर महेंद्र अग्रवाल और यहां कम्प्यूटर साइंस ऐंड इंजिनियरिंग के प्रफेसर टी वी प्रभाकर ने कॉलेज में हिंदू धार्मिक ग्रंथों के डिजिटलाइजेशन पर विवाद की खबर को खारिज कर दिया। प्रभाकर ने कहा, 'सभी अच्छी चीजों की आलोचना होती है। भगवदगीता का अंग्रेजी में ऑडियो ट्रांसलेशन करने का काम बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र के विशेषज्ञों तथा संस्कृत अनुवाद स्वामी ब्रह्मानंद ने किया है।

Published on:
11 Jan 2018 03:53 pm
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