शहर की खुली नालियों की वजह से यहां का सीवर सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है, लेकिन नगर निगम, जलकल और अन्य विभागों को इससे कोई सरोकार नहीं है. आपको बता दें कि शहर में 850 किमी. से भी ज्यादा का सीवर नेटवर्क है.
कानपुर। शहर की खुली नालियों की वजह से यहां का सीवर सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है, लेकिन नगर निगम, जलकल और अन्य विभागों को इससे कोई सरोकार नहीं है. आपको बता दें कि शहर में 850 किमी. से भी ज्यादा का सीवर नेटवर्क है. नमामि गंग योजना के तहत डिस्ट्रिक्ट-1 के 34 वार्डों में 370 करोड़ से नई सीवर लाइन डालने और पुरानी सीवर लाइनों की सफाई और मेंटेनेंस का काम किया जा रहा है. 80 करोड़ रुपए की लागत से बड़ी जेट मशीनों के जरिए जगह-जगह सीवर सफाई की जा रही है, लेकिन इन सब कवायदों पर खुली नालियां पानी फेर रही हैं.
ऐसी मिली है जानकारी
दरअसल, नालियों को सीवर नेटवर्क में जोड़ दिया गया है, इनके जरिए प्लास्टिक वेस्ट, गोबर और अन्य ठोस कूड़ा सीवर में जा रहा है. इसकी वजह से 1 हफ्ते पहले साफ किए गए सीवर भी चोक हो चुके हैं.
ऐसी की गई शिकायत
पिछले दिनों सैनिक नगर में खड़ंजा बिछाने का कार्य किया जा रहा है, लेकिन इसमें नालियां निर्माण कर ठेकेदार ने सीधे सीवर लाइन से जोड़ दिया है. इससे प्लास्टिक वेस्ट के साथ ही ठोस कूड़ा सीवर लाइन में जा रहा है. इससे सीवर लाइन चोक हो जा रही है. जल निगम ने पत्र लिखकर नगर निगम चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर मामले की शिकायत की है. इसी तरह की समस्या नमामि गंगे की टीम को जोन-4 स्थित हीरामनपुरवा, कर्नलगंज, तलाकमहल, चुन्नीगंज सहित अन्य इलाकों में फेस करनी पड़ रही है. इससे सीवर सफाई कार्य में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है और करोड़ों रुपए बर्बाद हो रहे हैं.
यहां पर खुली हैं नालियां
शहर में ग्वालटोली, विष्णपुरी, खलासी लाइन, नवाबगंज, अनवरगंज, लक्ष्मीपुरवा, दलेलपुरवा, कोपरगंज, जनरलगंज, कलक्टरगंज, परेड, परमट, दानाखोरी, तलाकमहल, कृष्णा नगर, हरजेंदर नगर आदि जगहों पर नालियों का बुरा हाल है. यहां नालियां पूरी तरह से खुली हुई हैं.
ऐसा कहते हैं अधिकारी
इस बारे में जल निगम के जीएम आरके अग्रवाल कहते हैं कि डिस्ट्रिक्ट-1 योजना के अंतर्गत 80 करोड़ से सीवर सफाई का कार्य किया जा रहा है. इसमें खुली नालियों की वजह से प्लास्टिक वेस्ट, पॉलिथीन सहित अन्य ठोस वेस्ट सीवर लाइनों में पहुंच रहा है. इससे साफ किए गए नाले 1 हफ्ते में ही चोक हो जा रहे हैं. इससे स्थिति कभी नहीं बदलेगी.