इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्‍ण कॉन्‍सेसनेस (इस्‍कॉन) गांवों में घी और अगरबत्‍ती बनाने का उपक्रम बहुत जल्‍द शुरू करने वाला है. इसके साथ ही इस्‍कॉन ने कानपुर वासियों को जैविक खेती करने और नशा मुक्‍ति की राह दिखाई. ग्रामीणों के विकास के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया.
कानपुर। इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्सेसनेस (इस्कॉन) गांवों में घी और अगरबत्ती बनाने का उपक्रम बहुत जल्द शुरू करने वाला है. इसके साथ ही इस्कॉन ने कानपुर वासियों को जैविक खेती करने और नशा मुक्ति की राह दिखाई. ग्रामीणों के विकास के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया. बुधवार को अंतरराष्ट्रीय साधु सम्मेलन 2018 के सत्र में संत देवकीनंदन दास ने कानपुर इस्कॉन की रिपोर्ट प्रस्तुत की. इसके बाद संत पंचरत्न दास और ग्रामीण विकास के प्रमुख दिव्य निताई दास ने बिरैचामएऊ जाकर निरीक्षण किया और ग्रामीणों के बीच कृष्ण चेतना के संबंध में प्रवचन किया.
ऐसी मिली जानकारी
इस्कॉन के ग्रामीण विकास प्रमुख संत दिव्य निताई दास और संत पंचरत्न दास दिन में बिरैचामऊ गांव पहुंचे. इस गांव में कानपुर इस्कॉन लोहिया ग्रुप के साथ समन्वय से सीएसआर के तहत ग्रामीण विकास कार्यक्रम चला रहा है. विदेशी साधुओं को देखकर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ लग गई. इसके बाद जब उन्होंने कृष्ण चेतना पर प्रवचन दिया तो लोग मंत्रमुग्ध से देखते ही रह गए.
दी गई ऐसी सीख
यहां ग्रामीणों को रोजगार, स्वास्थ्य, स्वच्छता और जैविक कृषि करने की सीख दी गई. मौके पर ये भी बताया गया कि आने वाले समय में घी बनाने, अगरबत्ती बनाने के उपक्रम शुरू किए जाएंगे. इससे लोगों को रोजगार मिलेगा. हाल ही में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 10 लोगों ने नशे की आदत छोड़ दी.
ऐसी मिलती है वास्तविक खुशी
संत बद्रीनारायण स्वामी ने यहां बताया कि लोग समस्याएं पैदा करके उनका हल ढूंढा करते हैं. समस्या का वास्तविक हल वहां होता है जहां से समस्या पैदा होती है. उन्होंने सैन डिएगो, पोर्टो रिको के संबंध का जिक्र करते हुए बताया कि लोग समुद्र तट और ताड़ के पेड़ों के नीचे जाकर खुशी तलाशते हैं, जबकि असली खुशी तो उनके अंदर है. हरे कृष्ण महामंत्र के जाप से वास्तविक खुशी मिलती है. इससे मन स्थिर हो जाता है.