कानपुर

दिवाली के दिन इस मंदिर में दीप जलाने से खुश होते हैं वीर हनुमान, माता लक्ष्मी की भी बरसेगी कृपा

कानपुर की घाटमपुर तहसील के जहांगीराबाद में सैकड़ों साल पुराना पवनसुत हनुमान मंदिर है, जहां दिवाली के दिन भक्तों का हुजूम उमड़ता है
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Oct 18, 2017
pawansut hanuman temple

नपुर. शहर से 40 किमी की दूरी पर स्थित घाटमपुर के पास जहांगीराबाद में सैकड़ों साल पुराना ऐतिहासिक पवनसुत हनुमान मंदिर है। दिवाली पर्व पर जो भी भक्त यहां आकर नौ दीप जलाता है, बजरंगबली उसकी मन्नत पूरी करते हैं। मंदिर के पुजारी राजन महाराज बताते हैं कि सैकड़ों साल पहले दिवाली पर्व के दिन भगवान बजरंगबली की मूर्ति खुदाई के दौरान जमीन से निकली थी। गांववालों ने विधि-विधान से पूजा अर्चना के बाद मूर्ति को मंदिर पर स्थापित कर दिया था। तब से इस मंदिर पर दीपावली बहूत धूमधाम के साथ मनाई जाती है। भक्त पवनसुत के दर पर आकर दीप जलाते हैं। इनकी कृपा से वो संतान सुख के साथ नौकरी और तरक्की पाते हैं। मान्यता है कि जो भक्त पवनसुत हनुमान मंदिर में दिवाली के दिन दीये जलाते हैं, माता लक्ष्मी की भी उन पर कृपा बरसती है।

ये रहा मंदिर का इतिहास
घाटमपुर तहसील स्थित जहांगीराबाद में सैकड़ों साल पुराना पवनसुत हनुमान मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि गांव के रहने वाले रामजी शुक्ला को पवनसुत ने सपने में आए और बताया कि मेरी मूर्ति पर जमीन के नीचे है, उसे बाहर निकालो। भोर पहर रामजी शुक्ल ने सपने के बारे में गांववालों को बताया और सभी लोग फावड़े के साथ जमीन खोदने लगे। कुछ दूरी पर उन्हें एक भव्य भगवान पवनसुत की मूर्ति दिखाई पड़ी। रामजी शुक्ल ने मूर्ति को दूध से स्नान कराकर उनका भव्य श्रंगार किया और जिस स्थान पर मूर्ति निकली उसी स्थान पर उसकी स्थापना कराई गई थी।

दिवाली के दिन भक्तों का लगता है तांता
पुजारी राजन महाराज के मुताबिक, यह बहुत ही पुराना मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण कराने वाले वाले राम जी शुक्ला तो इस दुनिया में नही है, लेकिन लेकिन उनके द्वारा बनवाया गई इस प्राचीन धरोहर को हम सभी ने संभाल कर रखा है। उन्होंने बताया कि पवनसुत मंदिर बहुत ही विख्यात है। वैसे पूरे साल यहां उन्नाव, फतेहपुर, हमीरपुर व आसपास के गांव से लोग दर्शन के लिए आते हैं, पर दिवाली के दिन भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। पुजारी कहते हैं कि जो भक्त संतान से सुख से वंचित हो वो दिवाली के दिन सुबह आकर भगवान पवनसुत के दर्शन कर उनके चरणों पर नौ दीप जलाए, उसे पुत्र-पुत्री की प्रात्ति होगी।

संतान का मुंडन करवाने के लिए आते हैं भक्त
पुजारी ने बताया कि भगवान पवनसुत के आर्शीवाद से जिन भक्तों को संतान सुख की प्राप्ति होती है वो बच्चे का पहला मुंडन इसी मंदिर पर आकर करवाते हैं। बताया कि यहां पर बड़ी संख्या में मुंडन संस्कार कराने के लिए भी लोग दूर-दराज से आते हैं। नवरात्र पर यहां पर पूजा पाठ के साथ ही राम लीला का भी आयोजन किया जाता है। जहानाबाद से आए श्रीवास्तव दंपत्ति ने बताया कि शादी के पांच साल बीत जाने के बाद उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई। हमने पिछले साल यहां आकर हाजिरी लगाई। भगवान पवनासुत की कृपा से हमें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। बच्चे का पहला मुंडन करवाने के लिए हम आए हैं।

हिन्दू-मुस्लिम मिलकर करते हैं पवनसुत की सेवा
पुजारी ने बताया कि जहांगीराबाद गांव में 70 फीसदी से ज्यादा आबादी हमारे मुस्लिम भाईयों की है, लेकिन यहां कभी सांप्रदायिक माहौल खराब नहीं हुआ। नवरात्र पर्व पर मुस्लिम भाई आगे बढ़कर रामलीला मंचन के लिए सहयोग देते हैं। साथ ही वो भी पवनसुत के दरबार पर माथा टेककर देश में अमन-चैन रहे इसके लिए दुआ मांगते हैं। हम लोग ईद और दिवाली पर्व इसी मंदिर पर मिलजुल कर मनाते आ रहे हैं। मंदिर के निर्माण और रख-रखाव के लिए मुस्लिम भाई दिन खोलकर धन देते हैं।

Updated on:
18 Oct 2017 08:45 am
Published on:
18 Oct 2017 08:41 am