
कानपुर में उजागर हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तरीके और भी चौंकाने वाले सामने आ रहे हैं। पुलिस के हाथ अब ऐसे कई अहम वीडियो लगे हैं, जिन्होंने इस संगठित नेटवर्क की पूरी कार्यप्रणाली को उजागर कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक वीडियो बरामद किए गए हैं, जिन्हें मुख्य आरोपी शिवम ने अपने मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों में सुरक्षित रखा था।
जांच में सामने आया है कि आरोपी शिवम ट्रांसप्लांट से पहले और बाद के वीडियो तैयार करता था। इन वीडियो में उन लोगों को दिखाया जाता था, जिन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट कराया होता था या किडनी डोनेट की होती थी। वीडियो में उन्हें स्वस्थ और सामान्य जीवन जीते हुए दिखाकर यह संदेश दिया जाता था कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है। इस तरह वीडियो के जरिए एक नकली भरोसे का माहौल तैयार किया जाता था, जिससे नए मरीज आसानी से झांसे में आ जाएं।
सूत्रों के अनुसार, इन वीडियो को दिखाकर आरोपी मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक रूप से प्रभावित करता था। वह बार-बार यह कहता था—“ये वही लोग हैं जिन्होंने ट्रांसप्लांट कराया है, आप खुद देख सकते हैं कि इन्हें कोई परेशानी नहीं है।” इस तरह के संवादों के जरिए वह लोगों के मन में मौजूद डर को खत्म करता और उन्हें ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करता था। पुलिस का मानना है कि यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति थी।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह ने किडनी दाताओं को तैयार करने के लिए अलग रणनीति अपनाई थी। डोनर्स के लिए विशेष रूप से मोटिवेशनल वीडियो बनाए जाते थे, जिनमें यह दिखाया जाता था कि किडनी देने के बाद भी व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इन वीडियो के जरिए लालच देकर ट्रांसप्लांट के लिए राजी किया जाता था, जिससे गिरोह को आसानी से डोनर मिल जाते थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद वीडियो इस पूरे रैकेट की परतें खोलने में बेहद अहम साबित हो रहे हैं। इनसे न केवल गिरोह के काम करने के तरीके की स्पष्ट जानकारी मिल रही है, बल्कि इसमें शामिल अन्य आरोपियों तक पहुंचने में भी मदद मिल रही है। फिलहाल पुलिस इस मामले की गहन जांच में जुटी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
पुलिस उपायुक्त पश्चिम,एस.एम.कासिम आबिदी ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है,सभी वीडियो को जांच में शामिल किया गया है।अब तक की पुलिस जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि सभी संबंधित व्यक्ति एक संगठित गिरोह (सिंडिकेट) के रूप में कार्य कर रहे थे तथा उसी के अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त थे। प्रकरण में 8 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीमों द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है। वर्तमान में लगभग 6-7 अभियुक्त फरार हैं, जिनकी शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
Published on:
07 Apr 2026 09:48 am
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