कानपुर

10 साल बाद बेटे के रूप में आई खुशियां, 5 घंटे में छिन गया पिता का साया, रोड़ हादसे में शिवनंदन सिंह की मौत

कानपुर के बिठूर में 10 साल बाद बेटे के जन्म की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई। पिता शिवनंदन सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई।

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Mar 25, 2026
बेटे के जन्म के कुछ घंटों बाद ही सड़क हादसे में पिता की मौत

Kanpur Accident News: यूपी में कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र में एक बड़ी घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। शादी के 10 साल बाद सोमवार को दंपती को बेटा हुआ। परिवार लंबे इंतजार के बाद खुशियों की किलकारियों में डूबा था, लेकिन सिर्फ पांच घंटे बाद एक सड़क हादसे ने नवजात शिशु से पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया। देखते-ही-देखते घर की खुशियां मातम में बदल गईं।

10 साल बाद पूरी हुई खुशी

चौबेपुर के चंद्रिका गांव निवासी शिवनंदन सिंह और उनकी पत्नी जूली के घर में खुशी का माहौल था। छह वर्षीय बेटी आयुषी और मां निर्मला के साथ पूरा परिवार बेटे के जन्म का इंतजार कर रहा था। कई बार उम्मीद जगी और टूटी, लेकिन इस बार किस्मत ने साथ दिया। सोमवार सुबह जूली को कल्याणपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शाम करीब चार बजे ऑपरेशन के बाद जूली ने बेटे को जन्म दिया। मां को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। परिवार वाले खुशी से झूम उठे। शिवनंदन ने तुरंत गांव में सबको फोन करके बेटे की खुशखबरी दी। घर पर मिठाइयां बांटी गईं। बधाइयों का सिलसिला चलने लगा। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद बेटे की गोद में आने का सपना साकार हो रहा था।

हादसा और पिता की मौत

रात करीब नौ बजे शिवनंदन बाइक से अस्पताल के लिए खाना और दूध लेकर लौट रहे थे। बिठूर-मंधना एलिवेटेड हाईवे पर बिल्हौर की ओर से तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। शिवनंदन बाइक से उछलकर सड़क पर गिर पड़े। तभी पीछे से आए चार वाहनों ने उन्हें रौंद दिया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। अस्पताल में जूली आईसीयू में थीं। उनके बड़े भाई रघुनंदन और सास निर्मला देखभाल कर रहे थे। परिवार ने जूली को अभी तक पति की मौत की खबर नहीं दी है। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें यह दर्द अभी नहीं बताया गया।

पुलिस की जांच

बिठूर थाना प्रभारी अशोक कुमार सरोज ने बताया कि तहरीर मिलते ही रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी। हादसे में टक्कर मारने वाले वाहन की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस तेजी से आरोपी वाहन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

पिता की गोद खाली रह गई

शिवनंदन खेती-किसानी करके परिवार चलाते थे। बेटे को गोद में उठाने का सपना उन्होंने सालों से देखा था। अस्पताल में हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रख रहे थे। आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर मुस्कान लिए वे दौड़-दौड़ कर काम कर रहे थे। लेकिन किस्मत ने कुछ और ही लिख रखा था। जिस गोद को उन्होंने बेटे से भरने का सपना देखा, वह गोद अब हमेशा खाली रह गई। परिवार रो-रोकर बुरा हाल है। छोटी बेटी आयुषी अभी नहीं समझ पा रही कि उसके पापा कभी नहीं लौटेंगे। मां निर्मला और पत्नी जूली के लिए यह सदमा बहुत बड़ा है।

एक परिवार की बेबसी

परिवार को समझ नहीं आ रहा है कि वो कैसे क्या करे। एक तरफ जहां परिवार में नन्हें मेहमान का आगमन हुआ है, तो वहीं दूसरी तरप उसके पिता अब इस दुनिया को छोड़ कर चले गए।

Published on:
25 Mar 2026 11:40 am
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